बरेली: पर्याप्त पानी नहीं मिलने से घटेगा धान का उत्पादन

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। खरीफ सीजन में जिले में सामान्य से काफी कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश न होने से सिंचाई करना मुश्किल हो रहा है और खेतों में धान की फसल सूख रही है। अगर यही हाल रहा तो धान के उत्पादन पर असर पड़ेगा।

जिले में करीब 2.48 लाख किसान करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में धान की खेती करते हैं। इसके सापेक्ष अनुमान था कि करीब पांच लाख उत्पादन होगा। जुलाई में मानसून की बारिश से किसानों को भी उम्मीद थी कि धान की फसल अच्छी होगी, लेकिन अब फसल बचाना मुश्किल हो गया है। जिनके पास निजी संसाधन हैं वह तो धान में पानी लगा ले रहे हैं लेकिन, जिनके पास नहीं है उनके खेतों में दरारें पड़ गई है। दूसरी तरफ छिटपुट बारिश धान समेत सभी फसलों में खरपतवार हो गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जून में करीब 42 मिमी और जुलाई में 128 मिमी ही बारिश हुई। अगस्त में भी नाममात्र बारिश हुई है। ऐसे में फसल उत्पादन पर असर पड़ना तय है।

कई अन्य फसलों पर भी मंडरा रहा खतरा
जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र चौधरी ने बताया कि बारिश न होने से धान की फसल ज्यादा प्रभावित हो रही है। यही हाल रहा तो उत्पादन पर असर पड़ना तय है। कृषि विशेषज्ञ विजय चौहान बताते हैं कि जिले में सबसे अधिक नुकसान आंवला क्षेत्र से जुड़े किसानों को होने की संभावना है। यहां सबसे कम बारिश हुई है।

नहरों में पानी पर खेत ऊंचे होने पर समस्या
नवाबगंज और रिठौरा से सटे गांवों में नहरों का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा क्योंकि खेत काफी ऊंचे पर हैं। नहरों तक पाइप पहुंचाने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है फिर भी उनका काम नहीं बन पता।

किसानों की सुनें
नलकूप से 120 रुपये प्रति घंटे की दर से पानी लेकर धान तो लगा लिया। अब उसे बचाना मुश्किल हो रहा है। हर तीसरे दिन खेतों में पानी लगाना पड़ रहा है। ऐसा ही मौसम रहा तो काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।- लाजपत राय, भोजीपुरा

किसी प्रकार से धान की रोपाई की। अब बरसात न होने से धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। समझ में नहीं आ रहा कि फसल को कैसे बचाया जाए।- नरेशपाल, क्योलड़िया

बारिश न होने से खेतों में पानी का अभाव है। जिसके चलते धान की फसल भी पीली होती जा रह है। इस बार काफी कम बारिश हुई है। - संतोष, क्योलड़िया

इस बार औसत से कम बारिश होने के कारण धान की फसल पर प्रभाव पड़ रहा है। आगे चलकर धान के उत्पादन पर इसका असर पड़ना तय है। -मुकेश, बिथरी चैनपुर

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