बरेली: विधवा पेंशन फर्जीवाड़ा...आखिर महिलाओं के पतियों के मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बने, जानिए मामला
रामनगर ब्लॉक में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में किया गया फर्जीवाड़ा
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बरेली, अमृत विचार। जिले की आंवला तहसील के रामनगर ब्लॉक के गोठा खंडुआ गांव में फर्जी विधवा पेंशन देने के मामले के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि जिन महिलाओं को विधवा पेंशन दी जा रही थी, उनके पतियों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बने और किसने बनाए। अब इसकी भी जांच शुरू हो गई है।
संपूर्ण समाधान दिवस में जिंदा व्यक्तियों की विवाहित पत्नियों को दिए जा रहे विधवा पेंशन के लाभ का मामला आने के बाद अमृत विचार ने इस मसले को लेकर अभियान चलाया। लिहाजा, जिम्मेदारों की नींद टूटी। जांच में नए-नए हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। जानकारों की माने तो किसी विधवा महिला को पेंशन का लाभ देने के लिए उसके मृत हो चुके पति का मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन में लगता है। गोठा खंडुआ गांव में विधवा पेंशन का लाभ ले रहीं अपात्र महिलाओं के आवेदन में भी उनके पतियों के मृत्यु प्रमाण पत्र लगाए गए।
इसके बाद ही पेंशन दी जा रही थी। अब सवाल यह उठता है कि जिंदा व्यक्तियों का मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी हो गया। किसने जारी किया । शुरुआत की प्रक्रिया से लेकर आखिरी मुहर किसने लगाई और क्यों । वह भी ऐसे लोगों के नाम पर जो गांव में जिंदा घूम रहे थे । अब इस मामले के तूल पकड़ने के बाद इस एंगल पर भी अफसरों ने जांच शुरू कर दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही विधवा पेंशन बनवाने के साथ फर्जीवाड़े का खेल कर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने वालों की भी गर्दनें फंस सकती हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की यह है प्रक्रिया
मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में शामिल रहने वाले एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिस व्यक्ति की गांव में मौत हुई होती है। यह उस ग्राम पंचायत के प्रधान प्रमाणित करते हैं। इसके बाद ग्राम पंचायत अधिकारी अपने हस्ताक्षर जारी करते हैं। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से पहले वह संबंधित व्यक्ति की मृत्यु के बारे में पूरी जानकारी जुटाते हैं, लेकिन गोठा खंडुआ गांव में कैसे और किन हालातों में जिंदा व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। यह बड़ा सवाल है।
एडीओ पंचायत की संस्तुति के बाद जारी होती पेंशन
जानकारों की माने तो मृत्यु प्रमाण पत्र की पुष्टि के लिए प्रधान के प्रमाणित करने, ग्राम पंचायत अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद मानी जाती है। इस प्रमाण पत्र को विधवा पेंशन के आवेदन के साथ जांच करते हुए एडीओ पंचायत विधवा पेंशन की फाइल की संस्तुति कर जिला प्राेबेशन अधिकारी के लिए बढ़ा देते हैं। इसके बाद बाल कल्याण विभाग की ओर से पेंशन जारी की जाती है।
ऐसे कैसे संभव...किसी को नजर नहीं आया ''खेल''
गोठा खंडुआ गांव में अपात्रों को विधवा पेंशन देने के लिए किए गए खेल की उधड़ रहीं परतें यह बताने के लिए काफी है कि इसमें आंख मूंदकर विवाहिताओं को पेंशन जारी की गई है, नहीं तो ऐसा कैसे संभव है कि हर स्तर पर हुए खेल को पकड़ा नहीं जाता। ऐसे में यह कहना गलत नहीं कि कहीं न कहीं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नीचे से लेकर ऊपर तक जिनकी टेबिलों से फाइलें गुजरी हैं, उनकी सहमति रही है। फिलहाल मामले में जांच चल रही है। जल्द ही अपात्रों पर कृपा बरसाने वालों की गर्दनें कानूनी शिकंजे में होंगी।
अपात्रों को विधवा पेंशन की फाइल पास कराने की जांच तो चल रही है। साथ ही विवाहिताओं के जिंदा पतियों का मृत्यु प्रमाण जारी कराने के मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। शनिवार, रविवार को गहनता से इसकी जांच करुंगा। फाइलों पर हस्ताक्षर मिले तो ग्राम प्रधान के खाते को सीज और सचिव को निलंबित करने की कार्रवाई होगी---गोविंद मौर्या, एसडीएम आंवला।
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