डीएम साहब! मातहत मेरे बेकाबू... छवि आपकी भी हो रही है खराब, जानिए पूरा मामला

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एसडीएम नवाबगंज के बाद अब जिला बंदोबस्त अधिकारी ने डीएम को पत्र लिखकर खोली चकबंदी विभाग में अराजकता की पोल

अनुपम सिंह, बरेली। अफसरों की लिखापढ़ी ही इशारा करने लगी है कि भ्रष्टाचार और कामचोरी के चंगुल में फंसा सरकारी सिस्टम चरमराने लगा है। शिकायतों के फर्जी निस्तारण के मामले में नवाबगंज नगर पालिका के ईओ के खिलाफ एसडीएम के पत्र लिखने के बाद अब ऐसा ही पत्र जिला बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पवन सिंह ने भी डीएम और एडीएम को लिखा है।

इसमें उन्होंने कहा है कि चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी और लेखपाल जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं, इस वजह से किसानों की समस्याएं हल होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। इससे न सिर्फ चकबंदी विभाग बल्कि जिला प्रशासन की भी छवि खराब हो रही है।

कई सरकारी विभागों में मातहतों का गैरजिम्मेदाराना रवैया उन अफसरों पर भारी पड़ने लगा है जो शासन या उच्चाधिकारियों के प्रति सीधे जवाबदेह हैं। जन शिकायतों का निस्तारण न होना या फर्जी निस्तारण किया जाना लगभग हर महकमे में बड़ा संकट बनता जा रहा है। आईजीआरएस और संपूर्ण समाधान दिवस में आने वाली शिकायतों का बड़ी संख्या में फर्जी निस्तारण की वजह से डिफाल्टर हो जाना हर महीने की बात है। इनमें सर्वाधिक शिकायतें किसानों की हैं। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों के लिए तमाम घोषणाओं के बावजूद उन्हें किस कदर चक्कर कटवाकर परेशान किया जा रहा है, यह अब जिला बंदोबस्त अधिकारी के पत्र से ही साफ हो गया है।

डीएम और एडीएम को भेजे पत्र में उन्होंने कहा है कि चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी लेखपाल जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं। चकबंदीकर्ता की रिपोर्ट्स को सिर्फ अग्रसारित किया जा रहा है। मामलों की जांच के बाद भी उसे रिपोर्ट पर दर्ज तक नहीं किया जा रहा है। 

अधिकतर रिपोर्ट ऐसे ही आगे बढ़ा दी जाती हैं। पत्र में कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारी पीड़ित किसानों की बात तक नहीं सुनते। न रिपोर्ट पर बयान दर्ज किया जाता है। अधिकतर रिपोर्ट प्रार्थना पत्र में दर्ज शिकायतों के अनुरूप नहीं होतीं न ही निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध कराई जाती हैं। फीडबैक लेने पर शिकायत करने वाले असंतुष्ट मिलते हैं। इस कार्यप्रणाली की वजह से विभाग के अधिकारियों के प्रति ही नहीं, जिला प्रशासन की छवि के संबंध में भी जनता में अच्छा संदेश नहीं जा रहा है।

केस-1
सदर तहसील के बरकापुर गांव के कालीचरण मंगलवार को चकबंदी कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि नौ बीघा जमीन पर विवाद चल रहा है। अपनी जमीन है मगर चकबंदी अधिकारी के गड़बड़ी करने की वजह से दूसरों के कब्जे में हैं। कई सालों से कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी हर तारीख पर कोई न कोई कमी निकालकर अगली तारीख दे दी जाती है।

केस-2
मीरगंज तहसील के रम्पुरा जाटान गांव के बुजुर्ग नारायण चलने फिरने में ठीक से समर्थ न होने के बाद भी तीन साल से दौड़ लगा रहे हैं। बंटवारे में ज्यादा जमीन चली गई जिसे वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। बोले, अभी कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। भागदौड़ करते-करते थक चुका हूं। हर बार नई तारीख दे दी जाती हैं, मगर समस्या जस की तस है।

अपने दफ्तरों से काम नहीं कर रहे चकबंदी अधिकारी
पाेर्टल पर आने वाली ऑनलाइन शिकायतों को निकालकर चकबंदी अधिकारियों को सौंपा जाना और रिपोर्ट मिलने पर पोर्टल पर अपलोड करने का काम जिला बंदोबस्त अधिकारी के दफ्तर से किया जा रहा है, जबकि यह काम चकबंदी अधिकारी कार्यालय से होना चाहिए। इसके लिए उनके कार्यालयों में कंप्यूटर भी उपलब्ध कराए गए हैं। इस पर आपत्ति जताई गई है। कहा गया है कि आगे कोई मामला लंबित या डिफाल्टर पाया गया तो कार्रवाई होगी।

खुद घिरे तो लिखा पत्र...मुख्यमंत्री के पास इतनी शिकायतें... क्या कर रहे हैं अफसर
चकबंदी विभाग में अराजकता के हालात पर पिछले दिनों चकबंदी आयुक्त जीएस नवीन कुमार ने भी आपत्ति जताई थी। इसमें उल्लेख किया था कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान न होने से परेशान किसान सीएम से शिकायतें कर रहे हैं। चकबंदी आयुक्त की ओर से जिला बंदोबस्त अधिकारी को जारी नोटिस में कहा गया था कि इतनी ज्यादा संख्या में शिकायतें मिलना साफ संकेत है कि उनकी कार्यशैली से किसानों में असंतोष है। 

हालत यह है कि कि जिले के चकबंदी अधिकारी आईजीआरएस की शिकायतों के निस्तारण के प्रति भी गंभीर नहीं हैं। आयुक्त ने सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा था। इस बारे में बात करने के लिए जिला बंदोबस्त अधिकारी पवन सिंह को कई बार फोन किया लेकिन उन्होंने एक बार भी कॉल रिसीव नहीं की।

शिकायतों के निस्तारण में देरी होने की वजह से आयुक्त ने नाराजगी जताई है। चकबंदी अधिकारियों को रवैये में सुधार लाकर अच्छा कार्य करने की हिदायत दी गई है--- डॉ. आरडी पांडेय, एडीएम सिटी।

चकबंदी विभाग
838 शिकायतें आईजीआरएस के तहत की गईं आठ अगस्त तक।
785 शिकायतों का ही इनमें से किया गया है अब तक निस्तारण।
53 शिकायतें अब तक लंबित।

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