भारत का बढ़ता कद

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Edited By Amrit Vichar
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रविवार को दो दिवसीय जी-20 सम्मेलन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्व में शांति की कामना के साथ समापन हो गया। समापन पर भारत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विश्व को एक परिवार की तरह कार्य करना होगा। जी-20 सम्मेलन भारत के लिए बहुत अहम रहा, इससे न सिर्फ देश की समृद्धि की राह आसान हुई है, बल्कि विश्व में भारत का कद भी बढ़ा है। सम्मेलन में शनिवार को भारत ने साझा घोषणा पत्र जारी किया जिसे सभी देशों ने एक सहमति से स्वीकार किया। 

सम्मेलन से चीन और रूस की बेरूखी और रूस-यूक्रेन के युद्ध की वजह से लग रहा था कि घोषणा पत्र पर सहमति बनने में कठिनाई होगी, लेकिन दोनों देशों ने बिना कोई अड़ंगा लगाए अपनी सहमति प्रदान की। इस घोषणा पत्र के जरिए भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए सभी को एक मंच पर आने का आवाहन किया। विदित है कि आतंकवाद संपूर्ण विश्व के लिए बड़ी समस्या बन चुका है जिससे आए दिन किसी न किसी देश का सामना होता रहता है। वहीं घोषणा पत्र के जरिए रूस-यूक्रेन युद्ध का नाम लिए बिना विश्व में युद्ध की परंपरा न पड़ने की भी एक राय में सहमति बनी।  

इसके अलावा अध्यक्ष होने के नाते भारत ने अफ्रीकन यूनियन (ग्लोबल साउथ) को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाने का प्रस्ताव रखा। भारत के इस प्रस्ताव पर भी सभी देशों ने सहमति दी और अफ्रीकन यूनियन के 55 देशों की आवाज को इसके सहारे वैश्विक बल मिलने की संभावना बन गई। इन अफ्रीकन यूनियन के शामिल होने के साथ ही अब जी-20, जी-21 हो गया है जिसका सारा श्रेय भारत को जाता है। गौरतलब है कि भारत अफ्रीकी देशों की काफी सहायता भी करता है। यह देश आर्थिक संपन्नता आदि के मामले में अंतिम पायदान पर हैं। 

इस तरह से भारत ने इनकी आवाज को उठाकर कूटनीतिक कामयाबी हासिल कर ली है जिसके जरिए भारत ने विश्व में अपने वैश्विक मित्रों का दायरा बढ़ाकर खुद को वैश्विक स्तर पर और शक्तिशाली होने की दिशा अहम कदम बढ़ाया है। साथ ही इन देशों को सदैव के लिए भारत का ऋ णी भी कर दिया है। साझा घोषणा पत्र की अहम बात यह भी है कि यह अभी तक का सबसे व्यापक घोषणा पत्र है जिसमें बेहतर भविष्य के लिए हरित विकास समझौते की परिकल्पना भी की गई है। 

इसमें स्वच्छ ईंधन, हाइड्रोजन के स्वैच्छिक सिद्धांत, बेहतर अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ लैंगिक समानता को बल देने और महिलाओं एवं लड़कियों को सशक्त बनाने पर सभी देशों में सहमति बनी। भारत सदैव से ही ‘विश्व एक परिवार’ की अवधारणा का देश रहा है। जी-20 सम्मेलन के जरिए यह भी साबित है गया है कि भारत न केवल विश्व संरक्षण के हित में है, बल्कि विश्व को दिशा भी दिखाने में भी सक्षम है। 

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