प्रयागराज : सरयू मामले में संबंधित मजिस्ट्रेट को अस्पताल जाकर पीड़िता का बयान दर्ज करने का निर्देश
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरयू एक्सप्रेस में लहूलुहान महिला सिपाही के मिलने के मामले में संबंधित मजिस्ट्रेट को अस्पताल जाकर घायल पीड़िता सिपाही का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है। उक्त मामले की अगली सुनवाई मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आगामी 13 सितंबर को सुनिश्चित की है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर हमें कोई संदेह नहीं है कि जांच की कार्यवाही सही दिशा में चल रही है और इसका परिणाम शीघ्र ही सामने आएगा,फिर भी घायल सिपाही का बयान सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के तहत दर्ज करना आवश्यक है, जो अभी तक दर्ज नहीं किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण साक्ष्य सिद्ध हो सकता है, जिससे आगे की जांच में सहायता भी मिलेगी।
गौरतलब है कि अयोध्या के पास सरयू एक्सप्रेस में एक महिला कांस्टेबल खून से लथपथ बर्थ के नीचे फर्श पर मिली थी। उसके कपड़े भी अस्त-व्यस्त थे। उसके चेहरे और शरीर पर कई गहरे घाव के निशान थे। महिला को सुबह 4 बजे सरयू एक्सप्रेस से अयोध्या में उतारा गया। उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रामा सेंटर में उपचाराधीन रखा गया है। पिछले रविवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उक्त घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार से जानकारी तलब की थी।
पुलिस अधीक्षक (जीआरपी) रेलवे और पुलिस उपाधीक्षक (जीआरपी), लखनऊ ने कोर्ट को जांच की प्रगति से अवगत कराते हुए बताया कि सर्किल अधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक रैंक के पुलिस कर्मियों की पांच टीमें गठित की गई हैं ,जो मामले की सघनता से जांच कर रही हैं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि वर्तमान जांच रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता पर किसी प्रकार के यौन हमले की पुष्टि नहीं हुई है। उसके चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से पर तेज धार वाले हथियार से वार किया गया है। पुलिस अधीक्षक (जीआरपी) रेलवे ने हथियार का पता लगाने के लिए अयोध्या रेलवे स्टेशन के पास लगभग 10 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर गहन तलाशी अभियान भी चलाया। संबंधित ट्रेन के एस्कॉर्ट गार्ड और रेलवे स्टेशन पर विक्रेताओं के बयान सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज किए गए हैं। ट्रेन मार्ग के साथ रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज और ट्रेन कोच से एकत्र किए गए फॉरेंसिक साक्ष्य पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा कोर्ट ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के तीन वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों, एक सर्जन और एक मेडिसिन की पांच सदस्यीय टीम को विश्वविद्यालय के डीन को पीड़िता की जांच करने और अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
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