बरेली: हल्के में लेते रहे कोरोना, लापरवाही से हुईं 32 मौतें

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। जिले में संक्रमित हुए व्यक्तियों के इलाज में लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। लापरवाही चाहे अस्पताल की हो या खुद मरीज की। शासन की गाइडलाइन के अनुसार बुखार और खांसी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत कोरोना की जांच करानी चाहिए। लेकिन लोगों की अपनी लापरवाही से उन्हें अपनों से …

बरेली, अमृत विचार। जिले में संक्रमित हुए व्यक्तियों के इलाज में लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। लापरवाही चाहे अस्पताल की हो या खुद मरीज की। शासन की गाइडलाइन के अनुसार बुखार और खांसी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत कोरोना की जांच करानी चाहिए। लेकिन लोगों की अपनी लापरवाही से उन्हें अपनों से दूर होना पड़ा।

पहले कोरोना का डर सताता रहा, बाद में हालत बिगड़ी तो झोलाछाप से दवा ले ली। जब तक समझे कि स्थिति बिगड़ गई है तब तक देर हो चुकी थी। कोरोना का टेस्ट कराने और रिपोर्ट संक्रमित आने के कुछ दिनों के अंदर ही कई लोगों की मौत हो गई। जिले में कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा 150 से अधिक है। इसमें करीब 32 संक्रमितों की मौत देर से इलाज मिलने और घर में इलाज लेते रहने के चलते हुई है।

केस-1
आवंला के गंज गांव के रहने वाले अर्पित गुप्ता (35) ने बुखार आने पर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा ली। इसके बाद भी उन्होंने और उनके परिजनों ने कोरोना की जांच नहीं कराई। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाया गया। यहां जांच हुई तो वह संक्रमित आए। इसके बाद उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

केस-2
भुता क्षेत्र के रहने वाली एक 74 वर्षीय महिला को पिछले माह सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। बुखार आने पर परिजन अस्पताल लाने की बजाय गांव के झोलाछाप के पास ले गए। दो दिन बाद स्थिति बिगड़ने पर निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां कोविड जांच में वृद्धा संक्रमित मिलीं। सांस लेने में दिक्कत होने पर कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां अगले ही दिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। सामने आया कि कई बीमारियों से ग्रस्त होने के बाद भी परिजन वृद्धा को कोरेाना के डर के चलते अस्पताल लाने से बचते रहे।

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