पंतनगर: सितंबर में भी मिलेगा आम का मजा, वैज्ञानिकों ने तैयार की नई प्रजाति
अर्शी खान, पंतनगर। गोविद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों ने आम की ऐसी प्रजाति विकसित की है जो सितंबर में भी आम देगी। वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि आम के शौकीनों के लिए अच्छी खबर बनकर आई है। यह प्रजाति देर से पकने के साथ-साथ गुणों से भी भरपूर है। पंतनगर विश्वविद्यालय …
अर्शी खान, पंतनगर। गोविद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों ने आम की ऐसी प्रजाति विकसित की है जो सितंबर में भी आम देगी। वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि आम के शौकीनों के लिए अच्छी खबर बनकर आई है। यह प्रजाति देर से पकने के साथ-साथ गुणों से भी भरपूर है।
पंतनगर विश्वविद्यालय के उद्यान अनुसंधान केन्द्र, पत्थरचट्टा के संयुक्त निदेशक डा. एके सिंह ने बताया कि आमतौर पर आम की प्रजाति अगस्त तक ही मिल पाती है। लेकिन हमारे द्वारा तैयार आम की नई विकसित प्रजाति पीएमएसएस-1 सितंबर अंत तक पककर खाने के लिए तैयार होती है।
इस प्रजाति को नगला के एक माली के घर में उगे एक स्थानीय आम के अंकुर के रूप में पहचाना गया था। फिर इस प्रजाति (जर्मप्लाज्म) के पूरे उत्तराखण्ड से 22 जर्मप्लाज्मा एकत्र किये गये। जिसमें से नौ जर्मप्लाज्मा को चिन्हित कर विकसित किया गया। शुरुआती दौर में नौ जर्मप्लाज्मा को नेशनल एक्टिव जर्मप्लाज्म साइट, लखनऊ में जमा करा दिया गया। इसके बाद संस्था ने विवि को एक प्रमाण-पत्र भी दिया है। इससे इस प्रजाति को विकमिस करने में आसानी होगी।
डा. सिंह ने बताया कि अब दूसरे चरण में इन नौ जर्मप्लाज्मा को आाईसी नम्बर लेने के लिए नेशनल ब्यूरो आफ प्लांट एण्ड जेनेटिक रिर्सोसिस, नई दिल्ली भेजा जाएगा तथा आईसी नम्बर मिलने के बाद इस प्रजाति के पौधों को किसानों को मुहैया कराया जाएगा।
वहीं निदेशक शोध डा. एएस नैन ने वैज्ञानिकों की इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इस विकसित प्रजाति से किसानों को आर्थिक मुनाफा होगा।
आम की नई प्रजाति पीएमएसएस-1 की खासियत
संयुक्त निदेशक डा. एके सिंह ने बताया कि आम की नई प्रजाति पीएमएसएस-1 के फल का वजन 250 ग्राम तक होता है। यह प्रजाति लंगड़ा आम से मिलती-जुलती है। इसके आम पतले छिलके सहित सुनहरे पीले रंग के है। इसमें टीएसएस 17.5 से 18.5 व्रिक्स, अम्लता की मात्रा 0.22 से 0.28 प्रतिशत, शुगर की मात्रा 12.20 से 13.00 प्रतिशत, एस्कार्बिक एसिड 35-40 मिलीग्राम/100 ग्राम, शर्करा व अम्लता का अच्छा मिश्रण होता है। इसकी गुणवत्ता बरकरार रहने के लिए 10-12 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
