पीलीभीत: दिन में बाघ..रात में नेपाली हाथी ने ली एक और जान, जानिए मामला
पीलीभीत/माधोटांडा, अमृत विचार। कई दिनो से जंगल के आसपास के इलाकों में उत्पात मचा रहे नेपाली हाथी जानलेवा साबित हुए। बाजार से लौट रहे ग्रामीण को कुचलकर जान ले ली, जबकि दो घायल हुए। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। विरोध को देते हुए वनकर्मी मौके पर जाने से भी घबराते रहे। ग्रामीणों ने शव नहीं उठने दिया। भारी पुलिस बल मनाने में जुटा रहा।
बता दें कि माधोटांडा थाना क्षेत्र के गांव मूसापुर निवासी 40 वर्षीय रमेश पुत्र बालचंद खेती करते थे। मंगलवार देर शाम वह चूका बाजार से पैदल घर जा रहे थे। गांव के ही सुंदरलाल और बाबूराम भी साथ थे। रास्ते में फैजुल्लागंज का जंगल पड़ता है। वहां पर करीब पांच नेपाली हाथी थे। जिन्होंने तीनों ग्रामीणों पर हमला कर दिया।
रमेश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य दो घायल हो गए। घायलों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। हमले का पता फटे ही ग्रामीण जमा हो गए। वन विभाग की लापरवाही को घटना का जिम्मेदार बताते हुए हंगामा किया।
आक्रोश को देखते हुए वनकर्मी मौके पर जाने से भी बचते रहे। ग्रामीणों का कहना था कि लगातार हाथी फसल और आशियाने उजाड़ रहे थे। इससे हमले की आशंका बनी हुई थी। मगर जिम्मेदारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उधर, घटना के बाद वन विभाग के अफसर दूरभाष से जानकारी करने में जुटे रहे।
उधर पुलिस को भी सूचना दे दी गई। ताकि पहले माहौल शांत हो फिर मौके पर टीम भेजी जा सके। फोर्स तो पहुंच गई लेकिन ग्रामीण ने शव नहीं उठने दिया। वन विभाग के अफसरों को बुलाने की मांग करते रहे। पुलिस मनाने में जुटी रही। इतना ही नहीं गुस्साई भीड़ के हमले के डर में वन चौकी से कर्मचारियों को भी हटा दिया गया था।
कई दिनों से उत्पात, पहले भी ले चुके जान
बता दें कि नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से पीलीभीत का जंगल सटा हुआ है। ऐसे में इसी रास्ते हर साल नेपाली हाथी आकर उत्पात मचाया करते है। पिछले कई दिनों से नेपाली हाथी फसल और छप्पर उजाड़ रहे थे।
इसकी सूचना वन विभाग के पास भी थी। मगर आरोप है कि कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीण की मौत के बाद गुस्साई भीड़ भी इसी को लेकर लापरवाही के आरोप लगाती रही।
बता दें कि करीब दो दशक पहले भी हाथियों को लेकर मानव वन्यजीव संघर्ष के हालात बन गए थे। गुनहान गांव में नेपाली हाथियों ने तीन जाने ली थी। इसके अलावा कुछ साल पहले की पीलीभीत से बरेली और फिर रामपुर तक नेपाली हाथी चले गए थे। इस दौरान भी एक युवक की जान ले ली थी।
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