भारत कोको का उभरता बाजार, आईसीसीओ का सदस्य बने : कार्यकारी निदेशक

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Edited By Amrit Vichar
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आबिदजान। अंतरराष्ट्रीय कोको संगठन (आईसीसीओ) के कार्यकारी निदेशक मिशेल एरियन ने कहा है कि कोको को लेकर भारत को नीतिगत चर्चाओं में भाग लेने के लिए आईसीसीओ का सदस्य होना चाहिए।

भारत कोको के उपभोग के मामले में उभरते बाजार में से है। भारत फिलहाल सालाना 27,000 टन कोको का उत्पादन करता है, जिसका अधिकतम उपयोग चॉकलेट बनाने में किया जाता है।

भारत एक लाख टन कोको आधारित उत्पादों का भी आयात करता है। आईसीसीओ के कार्यकारी निदेशक ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, “भारत में कोको का उत्पादन बहुत कम है।

लेकिन एक टन कोको का उत्पादन करने वाला कोई भी देश हमारा सदस्य बनने के लिए पात्र है।” उन्होंने कहा कि भारत इसका बहुत अधिक आयात करता है और एशिया में कोको की खपत के लिए उभरते बाजारों में से एक है।

इसे आईसीसीओ का सदस्य बनना चाहिए। उत्पादन करने और उपभोग करने वाले, दोनों देश इसका सदस्य बन सकते हैं। कोको के उपभोक्ताओं और उत्पादकों का एक अंतर-सरकारी संगठन आईसीसीओ पश्चिम अफ्रीका के कोटे डी'लवॉयर की आर्थिक राजधानी आबिदजान में स्थित है।

सदस्य बनने के फायदे गिनाते हुए एरियन ने कहा कि इससे बड़ी कंपनियों से चर्चा करने और नीति निर्माण में भाग लेने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को इसके अलावा सांख्यिकीय जानकारी, आर्थिक विश्लेषण, कार्यक्रमों में मुफ्त भागीदारी और नीतियों के निर्माण में तकनीकी सहायता जैसे फायदे भी होते हैं।

एरियन ने कहा कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका के पारंपरिक बाजारों में कोको की खपत अब और नहीं बढ़ने की उम्मीद है और उत्पादक देश बड़े पैमाने पर एशिया के उभरते बाजार पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “भारत में सिर्फ चॉकलेट ही नहीं, बल्कि कोको आधारित अन्य उत्पादों की खपत की भी काफी संभावनाएं हैं।

” आईसीसीओ अधिकारी ने कहा, “भारत बिस्कुट और डेयरी उत्पादों के लिए बहुत प्रसिद्ध है और इन उत्पादों में कोको का उपयोग एक घटक के रूप में किया जाता है। जितना अधिक आप बिस्कुट और डेयरी उत्पाद खाते हैं, उतना अधिक आप कोको शामिल करते हैं।” अधिकारी के मुताबिक, चीन भी चॉकलेट का सेवन नहीं करता है लेकिन उसने भारत की तरह ही डेयरी उत्पादों में कोको का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। विपणन वर्ष 2022-23 (अक्टूबर-सितंबर) में कोको का वैश्विक उत्पादन 50 लाख टन से थोड़ा कम था। 

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