विशेष साक्षात्कार : जो बिल से ही नहीं निकले वो क्या जीतेंगे लोकसभा चुनाव...ये क्या बोल गए सांसद घनश्याम सिंह लोधी?

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Edited By Amrit Vichar
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भाजपा सांसद बोले- रामपुर में पिछले सवा साल में जो काम हुआ वो 10 सालों में नहीं हो सका

रामपुर, अमृत विचार। लोकसभा चुनाव में महज कुछ माह शेष हैं, एक तरफ जहां विपक्ष में बिखराव है तो वहीं भाजपा ने बिसात बिछाकर चुनावी जमीन तैयार कर दी है। अन्य पार्टी के उम्मीदवार अभी तक अपनी बिलों से तक नहीं निकले हैं। बात करें भाजपा उम्मीदवारों की तो यहां एक-एक कार्यकर्ता गहनता से होमवर्क में जुटा है। रविवार को आगामी चुनाव की रणनीति और मुद्दों के संबंध में अमृत विचार के ब्यूरो चीफ आशुतोष शर्मा ने भाजपा सांसद घनश्याम सिंह लोधी से वार्ता की। सांसद ने बताया कि लोकसभा चुनाव की तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता जी-जान से जुटा हुआ है। चुनाव आज हो या कल डर तो उनको है जो अभी मैदान में ही नहीं उतरे हैं।

लोकसभा चुनाव की क्या तैयारी है?
अन्य पार्टी और भाजपा कार्यकर्ता में यही तो फर्क है। वो चुनाव की तैयारी तब करते हैं जब चुनाव नजदीक होता है। जबकि भाजपा कार्यकर्ता जिस दिन से चुनाव जीतता है उसी दिन से जनता के लिए समर्पित हो जाता है। चुनाव का डर उन्हें होगा, जो ढोंग रचते हैं। यहां तो जिस दिन से चुनाव जीता है उस दिन से जनता के बीच में हैं। चुनाव कल हो जाए हमें कोई डर नहीं।

अगर, पार्टी आप पर दांव खेलती है तो जनता आपको वोट किन मुद्दों पर देगी?
सवा साल में रामपुर में जितना विकास हुआ है, उतना शायद पिछले 10 वर्षों में नहीं हुआ। केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग से रामपुर वो-वो काम हुए हैं जोकि असंभव थे। जनता को जो उम्मीदें थी, उस पर खरा उतरने का प्रयास किया है। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। हमारी चौखट पर जिस फरियादी ने कदम रखा वो कभी निराश होकर नहीं लौटा। यही फर्क है। और मुझे लगता है कि जनता हमारे काम से खुश है। हमारे पास सिर्फ एक ही मुद्दा है वो है विकास। जोकि रामपुर में साफ देखा जा सकता है। अब तक 580 ग्राम पंचायतों में से 530 ग्राम पंचायतों में जनसंपर्क कर लिया है, वहीं अन्य का तो अता-पता तक नहीं है।



सवा साल में आपने रामपुर की जनता को क्या-क्या दिया?
यह बताने की आवश्यकता ही नहीं...विकास बोलता है। नवाबों के दौर का बना रामपुर रेलवे स्टेशन अब आधुनिक होने जा रहा है। यह मोदी जी के प्रयासों से संभव हो सका है। इसी तरह भइयानगला का पुल मिलने से सैफनी के लोगों का खर्चा और दूरी दोनों ही कम हुई। मिलक में पहले ट्रेन खड़े हो जाने की वजह से 50 गांव का संपर्क कट जाता था। लेकिन अब ओवरब्रिज स्वीकृत हो चुका है, बहुत जल्द निर्माण भी हो जाएगा। जाम के झाम से लोगों को मुक्ति मिली है। शाहबाद से लेकर बाजपुर दोराहे तक 70 किमी लंबी सड़क मिली है। जिले में ऐसे कई विकास हुए हैं।

लोकसभा चुनाव मई 2024 में प्रस्तावित है, आपके पास सात माह हैं इसमें आप रामपुर को और क्या-क्या देंगे?
योगी जी और मोदी जी ने रामपुर में जो विकास कार्य का लक्ष्य दिया है, कोशिश करेंगे कि यह चुनाव तक पूरा हो जाए। जिले में थूनापुर-खौद रोड 15-20 साल से जर्जर पड़ी थी। इसकी याद किसी जनप्रतिनिधि को नहीं आई। 29 सितंबर को कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद ने इस रोड को भी स्वीकृत कर दिया। 32 करोड़ की लागत से सात मीटर चौड़ी सड़क तैयार होगी। इससे जनता को आवागमन में कोई परेशानी नहीं होगी।

अगर, माना जाए कि पार्टी किसी और जातिवर्ग के प्रत्याशी पर दांव खेलती है, तो ऐसे में आपकी रणनीति क्या होगी?
पार्टी का सेवक हूं...पार्टी का सिपाही हूं। हाईकमान जो आदेश देगा उसका पालन होगा। एमएलसी चुनाव में पार्टी ने टिकट काट दिया था, उसके बाद भी जी-जान से चुनाव लड़ाया था। पार्टी ने सांसदी का टिकट दिया तो यह जिम्मेदारी निभा रहा हूं। ईश्वर की कृपा से हर जाति वर्ग का आशीर्वाद है। पार्टी अगर, फिर से विश्वास जताएगी तो उस पर भी खरा ही उतरुंगा।

क्या आपको लगता है कि रामपुर सीट पर भाजपा का परचम लहराएगा?
अरे...यह लगता नहीं, 100 फीसदी भाजपा का ही परचम लहराना है। यह इसलिए कहा जा सकता है कि अन्य पार्टी के उम्मीदवार तो अभी बिल से ही नहीं निकले हैं। वे तब निकलेंगे जब भाजपा कार्यकर्ता एक-एक घर जनसंपर्क कर लेंगे। विपक्षियों के पास जुमलेबाजी के अलावा कुछ शेष नहीं। चिंता न करें...केंद्र और रामपुर में भाजपा ही आ रही है।

2022 में जनता ने बड़ी उम्मीदों से आप पर विश्वास जताया, लेकिन अभी तक रामपुर में मेडिकल कॉलेज बस सपना ही बन कर रह गया...इस बारे में क्या कहेंगे?
मेडिकल कॉलेज को सपना तो नहीं कहा जा सकता है, लेकिन हां अभी तक यह प्रयास फलीभूत नहीं हो सके हैं। मेडिकल कॉलेज के संबंध में कई बार मुख्यमंत्री जी से मिल चुके हैं। पीपीपी मॉडल (पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप) पर मेडिकल कालेज के संबंध में चिकित्सा शिक्षा अनुभाग के विशेष सचिव दुर्गा प्रसाद नागपाल को पत्र लिखा था, जिस पर स्वीकृति भी मिल गई। बस पार्टनर न मिल पाने के कारण यह धरातल पर उतर नहीं सका है। पुलिस लाइन के पास चार एकड़ जमीन और ली जा चुकी है। जिस तरह से प्रयास चल रहे हैं इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि साल 2024 के अंत तक रामपुर को मेडिकल कॉलेज मिल जाएगा।

आजम खां ने आपका एमएलसी चुनाव में हेलीकॉप्टर से टिकट मंगवाया था, आपने चुनाव भी जीता था। फिर ऐसा क्या हुआ कि आजम खां से इतनी दूरी बढ़ गई?
बस यूं कहा जा सकता है कि सपा से मन ऊब गया। फिर कुछ चीजें मेल भी नहीं खाईं। मोदी जी और योगी जी का काम देखा तो मन बनाया भाजपा के साथ जुड़ने का, और फिर जुड़ गया। आजम खां के साथ रिश्ते कभी खराब नहीं रहे, न अब हैं। धीरे-धीरे समय के साथ बदलाव होना जरूरी है। जनता ने भी बदलाव की इच्छा जताई, जिसका नतीजा सबने देखा।

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