भीमताल: 22 साल बाद भी भीमताल को नहीं मिल पाया रोडवेज बस अड्डा
भीमताल, अमृत विचार। भीमताल पर्यटन नगरी में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है, साथ ही भीमताल शिक्षण संस्थानों के हब के रूप में भी अपनी विशेष पहचान बना रहा है।
इसके अलावा भीमताल अपने आस-पास पैरागलाइडिंग, वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर हब और अन्य कई पर्यटन स्थलों एवं धार्मिक स्थलों को अपने साथ जोड़ा हुआ है, हर वर्ष कई लाखों की संख्या में पर्यटक देश-विदेश से भीमताल पहुंचते हैं। लेकिन 'अथिति देवो भवः' की परम्परा निभाने वाले पर्यटन नगरी भीमताल के लोग और पर्यटकों के रोडवेज बस स्टैंड इधर-किधर है पूछने पर हर बार शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।
जबकि उत्तराखंड राज्य बनने से पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार ने भीमताल डाठ पर रोडवेज का टिकट काउंटर बनाया था। लोगों को स्टैंड की सुविधा दी थी जो राज्य बनने के समय से हटा दी गयी, तब से अब तक न जानें भीमताल वासियों ने कितनी बार शासन-प्रशासन से भीमताल में रोडवेज बस स्टैंड खुलवाने की मांग उठा चुके हैं पर हर बार मात्र आश्चासन ही मिलकर रह जाता है।
भीमताल नगर परिसीमन के उपरांत लगभग अपने 'भौगोलिक क्षेत्र' में 14.57 वर्ग किमी. की बढ़ोत्तरी कर चुका है। साथ ही नगर के एक छोर सातताल से दूसरी छोर नौकुचियाताल तक फैल चुका है। जानकारी के अनुसार नगर की जनसंख्या करीब 18000 के पास है। लेकिन नगर वासियों को इतने बड़े भू-भाग में एक छोटा सा रोडवेज का बस अड्डा अब तक नहीं बना। यात्री-यात्रा के लिए घंटो धूप व बरसात में रोड किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं।
भीमताल नगर क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र बृजवासी ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व में निम्न स्तर से लेकर उच्च स्तर तक शासन-प्रशासन दोनों के प्रतिनिधियों से भीमताल में रोडवेज बस अड्डा खुलवाने की मांग रखी, लेकिन जमीन का चयन न होने का हवाला देकर भीमताल की मुख्य मांग को अब तक अनदेखा किया गया है।
उन्होंने बताया कि पत्र के जवाब में 'परिवहन विभाग' खुद कह चुका है कि भीमताल में रोडवेज बस स्टैंड की मांग नीतिगत विषय है, साथ में जिला प्रशासन जमीन नहीं होने की बात कहता है। पत्राचार करने के उपरांत हाल में परिवहन सचिव ने क्षेत्र का दौरा किया, किंतु स्थापना निर्माण कार्यवाही की शुरुआत तक नहीं हुई। बृजवासी ने मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल माध्यम से मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी है।
