बरेली: बछड़े को दस्त से बचाएगा प्रोबायोटिक पाउडर, IVRI के पशु पोषण विभाग में किया गया निर्माण

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जन्म के चौथे दिन मां से अलग करने पर तनाव में आता है बछड़ा

बरेली, अमृत विचार। जन्म के फौरन बाद मां से अलग कर देने पर बछड़ा अत्यधिक तनाव में घिर जाता है। इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वह आसानी से बैक्टीरियल रोगों की चपेट में आ जाता है। इनमें डायरिया उसके लिए सबसे ज्यादा घातक साबित होता है। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने बछड़े को डायरिया से बचाने के लिए प्रोबायोटिक पाउडर बनाया है। यह पाउडर चारे में मिलाकर देने से बछड़े को बीमारियों से बचाया जा सकता है।

आईवीआरआई के पशु पोषण विभाग की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अंजू काला ने बताया कि बछड़े को जन्म के चौथे दिन उसे मां से अलग करने को वीनिंग कहा जाता है। वीनिंग के बाद बाहर का चारा-पानी खाने से बछड़े कई बार ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया की चपेट में आ जाते हैं। दस्त उसे सर्वाधिक प्रभावित करता है। शरीर में पानी की कमी होने से वह निमोनिया जैसी बीमारी की भी चपेट में आ जाता है। सही इलाज न मिलने पर उसकी मृत्यु तक हो जाती है। डॉ. काला ने पशु पोषण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एलसी चौधरी और डॉ. महेश के सहयोग से प्रोबायोटिक पाउडर बनाया है। इसमें आंत में पाए जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। प्रोबॉयोटिक खराब न हो, इसके लिए उसमें क्रप्टोटेकटेंट मिलाया जाता है। आईवीआरआई के एलपीएम विभाग में बछड़ों पर इसे टेस्ट करने पर परिणाम संतोषजनक मिले है।

बछड़े की बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्षमता
डॉ. अंजू ने बताया कि प्रोबॉयोटिक पाउडर के प्रयोग से बछड़े के शरीर पर फर और आंखों में भी चमक आती है। सक्रियता के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक वृद्धि तेज होती है। इस पाउडर को रूम टेंप्रेचर पर एक साल तक संग्रहीत किया जा सकता अभी 50 मिलीग्राम की डोज निर्धारित की गई है जो किसानों को प्रति पशु एक रुपये से भी कम कीमत में उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों आल इंडिया कोऑर्डिनेटेड प्रोजेक्ट फॉर पिग्स के अनुरोध पर शूकर के लिए भी विशेष प्रोबायोटिक पाउडर का निर्माण किया है।

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