बरेली: पितृपक्ष ने निबंधन विभाग को दिया 13 करोड़ का घाटा, जानिए क्या है पूरा मामला

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सामान्य दिनों की अपेक्षा 40 फीसदी कम हुए हर रोज होने वाले बैनामे

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अनुपम सिंह, बरेली। सरकार को सर्वाधिक राजस्व देने वाले निबंधन विभाग की आय में पितृ पक्ष के दौरान करीब 40 प्रतिशत की कमी आ गई है। जिला मुख्यालय के दोनों निबंधन कार्यालयों की रोज की आय में औसतन 30-30 लाख की कमी आई है जबकि हर तहसील में रोज पांच लाख से ज्यादा का राजस्व प्रभावित हुआ है। इस तरह रोज की औसत राजस्व आय में करीब 90 लाख की कमी आई है। पितृपक्ष खत्म होते-होते निबंधन विभाग को 13 करोड़ से ज्यादा का घाटा होने के आसार हैं।

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पितृपक्ष की शुरुआत 29 सितंबर को हुई थी जो 14 अक्टूबर यानी शनिवार तक चलेंगे। सब रजिस्ट्रार रवि श्रीवास्तव के अनुसार जिला मुख्यालय पर दोनों निबंधन कार्यालयों में सामान्य दिनों में 150 से 160 बैनामे होते हैं। एक निबंधन कार्यालय में इनके जरिए 65 से 80 लाख रुपये का राजस्व आने का औसत है। दोनों कार्यालयों की राजस्व आय डेढ़ करोड़ के पार चली जाती है। पितृपक्ष शुरू होने के बाद दोनों कार्यालयों में बैनामों की संख्या 40 से 45 और राजस्व आय भी 40 से 50 लाख के बीच सिमट गई है।

हर एक तहसील के निबंधन कार्यालय में भी रोज 30 से 40 बैनामे होते हैं। पितृपक्ष के दिनों में इन सभी निबंधन कार्यालयों रजिस्ट्रियों की संख्या घटने से राजस्व कम हो गया है। ग्रामीण क्षेत्र की तहसीलों में इन दिनों 20 से 25 बैनामे होने का ही औसत है। राजस्व सामान्य दिनों में 10 लाख के आसपास होता था जो अब पांच से छह लाख ही रह गया है।

नवरात्र में पितृपक्ष की भरपाई की उम्मीद
माना जा रहा है कि औसत के हिसाब से पितृपक्ष के दौरान जिले में दो हजार से ज्यादा बैनामे कम हुए हैं। इस घाटे की भरपाई नवरात्र में होने की उम्मीद की जा रही है। दरअसल, हिंदू समुदाय के लोग पितृपक्ष में नए काम की शुरुआत शुभ नहीं मानते। नवरात्र के दिन शुभ माने जाते हैं। विभाग के अफसर कहते हैं कि हर साल पितृपक्ष में हुआ घाटा नवरात्र में पूरा हो जाता है।

नए सर्किल रेट से 15 फीसदी बढ़ा राजस्व
दो महीने पहले जिला प्रशासन ने जमीनों के नए सर्किल रेट लागू किए थे, इससे भी स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को फायदा हुआ है। अफसरों के मुताबिक नए सर्किट रेट लागू होने से रजिस्ट्रियों की संख्या में कोई इजाफा तो नहीं हुआ है, लेकिन रेट महंगे होने से विभाग का 12 से 15 फीसदी राजस्व बढ़ा है।

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