बरेली: छेड़खानी की शिकार आठ साल की बच्ची ने खुद लिखकर दी थी अर्जी, न पुलिस पिघली न अफसर
अनाथालय में 31 जुलाई को हुई थी छेड़खानी, कार्रवाई न होने पर 13 अगस्त को बहन के साथ पहुंची थी बिहारीपुर पुलिस चौकी
बरेली, अमृत विचार। बच्चियों के यौन शोषण के मामले में सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के संवेदनशीलता और सख्ती के तमाम निर्देश होने के बावजूद पुलिस कैसे-कैसे मामले दफन कर देती है, आर्य समाज अनाथालय में कक्षा दो में पढ़ने वाली बच्ची के साथ हुई छेड़खानी की घटना भी इसका एक उदाहरण बन गई है।
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वार्डन और अनाथालय प्रबंध कमेटी से शिकायत के बाद भी प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित बच्ची ने अपनी बड़ी बहन के साथ खुद 13 अगस्त को बिहारीपुर पुलिस चौकी जाकर अपनी राइटिंग में प्रार्थनापत्र दिया था लेकिन चौकी इंचार्ज ने उसे अनदेखा कर दिया। इसी दिन समाजसेवी नीरज सैनी की ओर से भी तत्कालीन एसपी देहात को प्रार्थनापत्र दिया गया लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक तरफ जहां पुलिस और प्रशासन के तमाम अफसर मिशन शक्ति अभियान के तहत मंचों से नारी सशक्तीकरण के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अनाथालय में आठ साल की बच्ची से छेड़खानी के बाद पुलिस के स्तर पर ढाई महीने तक हुई टालमटोल यह भी बता रही है कि ऐसे दावे अंदर से कितने खोखले हैं।
दूसरी में पढ़ने वाली बच्ची के साथ अनाथालय के प्रधान ने 31 जुलाई को छेड़खानी की थी। वार्डन रोली दुबे के मुताबिक बच्ची की बड़ी बहन ने उसी दिन उन्हें इसकी जानकारी दी जिसके बाद वार्डन ने अगले ही दिन इस मामले में प्रबंध कमेटी से शिकायत की। प्रबंध कमेटी ने इसे टालमटोल कर दी। रोली दुबे का कहना है कि कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने कई और पत्र लिखे लेकिन फिर भी कमेटी टस से मस नहीं हुई। इस पर उन्होंने शुक्रवार को कोतवाली पुलिस को तहरीर दी।
रोली दुबे भले ही पुलिस को कोई सूचना देने से इन्कार कर रही हैं लेकिन इस बीच यह भी साफ हुआ है कि पुलिस तक इस घटना की सूचना भी खुद पीड़ित बच्ची के माध्यम से ही पहुंच गई थी जिस पर उसने कोई गौर नहीं किया। बच्ची की बहन की खुद की लिखी एक चिट्ठी अमृत विचार को मिली है, जिसे लेकर वह 13 अगस्त को खुद बिहारीपुर पुलिस चौकी गई थीं और वहां चौकी प्रभारी को दी थी।
इसी दिन अनाथालय में अक्सर खाने-पीने जैसी चीजों का प्रबंध करने वाले समाजसेवी नीरज सैनी भी प्रबंध कमेटी की ओर से कोई कार्रवाई न किए जाने से हताश होकर एसएसपी से शिकायत करने पुलिस ऑफिस पहुंचे थे। एसएसपी की अनुपस्थिति में उन्होंने तत्कालीन एसपी देहात को प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन पुलिस के स्तर पर इस मामले की कोई जांच तक नहीं कराई गई। ब्रह्मपुरी मालीवाड़ा में रहने वाले नीरज सैनी बताते हैं कि उन्होंने इस मामले में कोतवाली पुलिस को भी प्रार्थनापत्र देकर जांच कराने की मांग की थी लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया।
प्रधान के खिलाफ ढेर शिकायत... उतने ही उसके पैरोकार भी
अनाथालय के प्रधान ओमकार आर्य के खिलाफ आरोपों की कमी नहीं है। एक आरोप यह भी है कि वह कई लड़कियों पर शादी करने के लिए दबाव बनाता रहा है। इस बारे में भी उसके खिलाफ प्रबंधन से शिकायत की गई थी लेकिन प्रबंधन ने उसे भी अनदेखा कर दिया।
शुक्रवार को ही अनाथालय में छोटे बच्चों से मजदूरी कराने का भी वीडियो वायरल हुआ था। बताया जाता है कि ओमकार के तमाम पैरोकार भी हैं। उन्हीं की वजह से उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई होना तो दूर, जांच तक नहीं हुई। आठ साल की बच्ची से छेड़खानी जैसा सनसनीखेज मामला तक दबा दिया गया।
... तो अनाथालय की प्रबंध कमेटी गुनहगार क्यों नहीं
इस बार भी पुलिस ने आरोपी ओमकार आर्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे तो गिरफ्तार कर लिया लेकिन बच्ची के साथ हुई छेड़खानी की घटना को ढाई महीने तक दबाए रखने के मामले में अनाथालय की प्रबंध कमेटी के लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
हालांकि कानूनी तौर पर घटना को दबाने की कोशिश करने के लिए वह भी बराबर की जिम्मेदार है। सीओ श्वेता यादव का कहना है कि अभी उन्हें बहुत सारे तथ्य मौखिक तौर पर ही बताए गए हैं। विवेचना के दौरान अगर प्रबंध कमेटी के खिलाफ मामले को दबाने के आरोप साबित हुए तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अनाथालय के प्रधान के खिलाफ वार्डन के तहरीर देने के बाद जांच कर सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच के साथ बच्चों से पूछताछ की। आरोपी के बच्ची से छेड़खानी करने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है--- श्वेता कुमारी यादव, सीओ प्रथम।
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