रामपुर : आजम खां और उनके परिवार के खिलाफ 430 पन्नों में आया फैसला, 11 बहसों में हो गया खेल खराब
रामपुर, अमृत विचार। बुधवार को आजम खां और उनके परिवार के खिलाफ दो जन्मप्रमाण का फैसला 430 पन्नों में आया। जिसमें तीनों को सात-सात साल की सजा का पूरा चिट़्ठा दिया गया। जिसका विरोधी इंतजार कर रहे थे।
सपा नेता आजम खां को अपने बेटे अब्दुल्ला आजम खां के दो जन्मप्रमाण पत्र बनवाने भारी पड़ गए। जिसकी जानकारी उनके विरोधियों को पड़ गई थी। उसके बाद उनके व परिवार के खिलाफ लोगों ने घेराबंदी शुरू कर दी थी। दो जन्मप्रमाण पत्र मामले में विधायक आकाश सक्सेना ने सबूतों के आधार पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके बाद पुलिस ने घेराबंदी करते हुए उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। उसके बाद लगातार मामले की सुनवाई चल रही थी। जहां बुधवार को आखिरकार आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां और उनकी पत्नी के खिलाफ 430 पन्नों में फैसला आ गया।
इस मामले में कोर्ट में 11 तारीखों पर बहस की गई। 17 मार्च 2023 को तीनों आरोपियों के बयान दर्ज कराए गए थे। एक अप्रैल 2019 को काफी पन्नों की चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल हुई थी। दोनों ओर से करीब 15 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे। जबकि 18 अगस्त 2021 को आरोप तय कर दिए गए थे। जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से 70 प्रकार के साक्ष्य कोर्ट में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पेश किए गए थे। जबकि बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों को बचाने के लिए 37 तरह के दस्तावेज पेश किए गए, लेकिन वह उनको नहीं बचा पाए।
सुबह से ही छावनी में तब्दील हो गया था कोर्ट
रामपुर। आजम खां और उनके परिवार को बुधवार को तारीख पर आने की जानकारी मिलने के बाद पूरा शहर छावनी में तब्दील हो गया था। सुबह से ही उनके घर से लेकर कोर्ट परिसर में पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी। कई सीओ को कोर्ट परिसर में तैनात किया गया था। इसके अलावा कई थानों की फोर्स भी सुरक्षा के लिहाज से तैनात रही। इसके अलावा कोर्ट में आने वाले वादकारी आजम खां को देखने के लिए छत पर खड़े रहे। उनके कोर्ट से बाहर आते ही मोबाइल में कैद करना शुरू कर दिया।
दो साल तीन माह के बाद जेल की चार दीवारी से रिहा हुए थे आजम खां
रामपुर। सपा के कद्दावर नेता आजम खां की मुसीबतें कई साल से लगातार बढ़ती रही हैं। उसी के चलते वह दो साल तीन माह के बाद 20 मई 2022 को सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा हुए थे। अब 18 अक्टूबर 2023 दो जन्मप्रमाण पत्र मामले में सात साल की सजा में जेल चले गए। सपा के फायर ब्रांड नेता मोहम्मद आजम खां ने सपा शासन काल में रामपुर में तमाम कार्य किए थे। उस समय लोग आजम खां को मिनी मुख्यमंत्री के नाम से भी पुकारते थे लेकिन सपा सरकार जाने के बाद सूबे में आई भाजपा सरकार ने आजम खां और उनके परिवार पर शिकंजा कसना शुरूकर दिया था।
आजम खां पर भैंस, बकरी चोरी से लेकर दो-दो जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट मामले के अलावा अजीमनगर सहित शहर के विभिन्न थानों में लगभग 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने विवेचना के बाद सभी मामलों में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए हैं। लगातार सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने आजम खां के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के साथ ही 82 की कार्रवाई भी की थी। इस पर 26 फरवरी 2020 को पूर्व सपा सांसद आजम खां ने अपनी पत्नी पूर्व शहर विधायक डा. तजीन फात्मा बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। कोर्ट ने तीनों को जेल भेज दिया। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से तीनों को रातों-रात सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया था। दो साल तीन माह के बाद 20 मई 2022 को आजम खां का सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा हो गए थे। वह लगातार कई मामलों में कोर्ट में हाजिर हो रहे थे।
ईडी के निशाने पर रहा परिवार
रामपुर। आजम खां का ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर विश्वविद्यालय भी भाजपा सरकार में निशाने पर आ गया था। आजम खां पर जौहर विश्वविद्यालय के लिए बहुत से किसानों की जबरन जमीन कब्जाने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया गया था। शत्रु संपत्ति भी जौहर विश्वविद्यालय परिसर में है। उसके बाद आजम खां ईडी के निशाने पर आ गए थे। कई बार ईडी की टीम रामपुर भी आ चुकी है। शत्रु संपत्ति कब्जाने के मामले में कुछ जमीन को सील कर दिया गया था।
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