बरेली: अक्षर विहार की कब्जामुक्त कराई गई 21 सौ वर्गमीटर भूमि पर दोबारा कैसे हुआ बिल्डरों का कब्जा?, जांच शुरू
करोड़ों की जमीन की हेराफेरी के मामले में नगर निगम और राजस्व विभाग के अफसरों की भूमिका का भी होगा परीक्षण
बरेली, अमृत विचार। व्यावसायिक दृष्टि से शहर के सबसे प्रमुख इलाकों में शामिल सिविल लाइंस के अक्षर विहार तालाब की 21 सौ वर्ग मीटर जमीन को प्रशासन की ओर से कब्जामुक्त कराकर नगर निगम के सुपुर्द किए जाने के बावजूद उस पर दोबारा बिल्डरों काे कब्जा दे दिया गया। नगर निगम से लेकर राजस्व विभाग तक के अफसरों पर सवाल खड़े करने वाले इस प्रकरण में अब फिर जांच शुरू हो गई है। ऊपर से निर्देश आने के बाद नगर निगम में इस प्रकरण के रिकॉर्ड तलाश किए जाने लगे हैं।
अक्षर विहार तालाब की जिस जमीन पर बिल्डरों का अवैध कब्जा बताया जा रहा है, प्रमुख इलाके में होने के कारण उसकी कीमत करोड़ों में है। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक यह जमीन नजूल की थी, लेकिन बिल्डरों के आगे नगर निगम और प्रशासन के अफसर इस कदर बिछे कि पहले उसे फ्रीहोल्ड कराया गया और फिर बिल्डरों का कब्जा करा दिया गया। बता दें कि बरेली पूरे प्रदेश में अकेला नगर निगम है जो नजूल भूमि का केयर टेकर है।
बाकी जिलों में प्रशासन नजूल भूमि का केयर टेकर है। यही वजह है कि इस जमीन पर बिल्डरों का कब्जा कराने में पूर्व नगर आयुक्तों की गैरजिम्मेदारी की सबसे प्रमुख भूमिका मानी जा रही है। वक्त पड़ने पर प्रशासन के अफसरों ने भी आंखें मूंद लीं।
पहली बार इस जमीन पर बिल्डरों के कब्जे के बाद शासन के निर्देश पर प्रशासन के अफसरों ने लंबी जांच की थी जिसके बाद 2020-21 में नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में इस जमीन को कब्जामुक्त कराया गया था। दिसंबर 2021 में ही कोर्ट में चल रहे केस का फैसला अपने पक्ष में आने का तर्क देते हुए जमीन पर फिर कब्जा कर लिया और तालाब की ओर से दीवार भी खड़ी कर ली। एडीएम के आदेश को नजरंदाज कर नजूल भूमि कब्जे में दे दिए जाने का मामला अब फिर खुला है।
बिल्डरों ने तोड़ दिया नगर निगम का पुराना नाला, अब स्मार्ट सिटी से नए का निर्माण
बिल्डरों ने जमीन पर फिर कब्जा करने के बाद तालाब की ओर दीवार बनवाने के साथ उससे सटा नगर निगम का पुराना नाला भी तोड़ दिया। अब स्मार्ट सिटी कंपनी के पैसे से नया नाला बनाया जा रहा है। इस नए नाले के निर्माण के लिए बिल्डर की दीवार और नाले के बीच एक मीटर जगह छोड़ी गई है।
इसके पीछे बी अफसरों की साठगांठ बताई जा रही है। बता दें कि अक्षर विहार तालाब का मामला काफी विवादित रहा था। कब्जा करने वालों ने एक बाउंड्री बनाकर काफी तालाब को पाट भी दिया है। अक्षर विहार की फ्री होल्ड हुई जमीन नजूल भूमि थी, लेकिन इसकी आड़ में तालाब की जमीन भी बेचने के आरोप लगे थे।
बदला नहीं जा सकता नजूल भूमि का स्वरूप
नजूल लैंड की धारा 41 कहती है कि उसका स्वरूप नहीं बदला जा सकता। इसके बावजूद नजूल भूमिक के केयर टेकर नगर निगम के अफसरों की साठगांठ से ही यह जमीन फ्रीहोल्ड हो गई और कब्जामुक्त कराए जाने के बावजूद उसके हाथ से निकल गई।
16 हजार वर्गमीटर है तालाब का रकबा
तालाब का रकबा 16 हजार स्क्वायर मीटर है। बाकी उसकी बंजर भूमि है। बताया जाता है कि तालाब की भूमि को बंजर घोषित किया गया है। आसपास के लोगों के मुताबिक पहले तालाब का दायरा काफी बड़ा था लेकिन अब छोटा हो गया है। तालाब में बीच का गुंबद पहले काफी दूर दिखता था लेकिन तालाब पाट दिए जाने के बाद काफी नजदीक आ गया है।
अक्षर विहार की भूमि प्रकरण फिर जांच होगी। कोई शिकायत हुई है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है--- अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त।
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