शाहजहांपुर में मिलावट का धंधा, चायपत्ती में मिलाया जा रहा लोहे का बुरादा

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शाहजहांपुर, अमृत विचार। छह अगस्त को नवादा इंदेपुर में पकड़ी गई नकली चाय की पत्ती में मिलावटखोर बजन बढ़ाने के लिए हानिकारक लोहे के कण मिलाते थे। जांच को लखनऊ लैब भेजे गए नमूने से इसका खुलासा हुआ है। नमूना असुरक्षित पाया गया है। अब आरोपियों के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में आपराधिक वाद दायर करने की तैयारी है।

खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने छह अगस्त को चौक कोतवाली क्षेत्र में नवादा इंदेपुर स्थित एक फैक्ट्री में छापा मारा था। पुलिस ने जितेंद्र नामक युवक को मौके से पकड़ा था, वह फैक्ट्री का संचालन कर रहा था। फैक्ट्री में ताजा कंपनी की नकली चाय की पत्ती बनाई जा रही थी।

इसके अलावा गगन ब्रांड का नकली गुटखा भी बनाया जा रहा था। यहां नकली ताजा चाय की छह क्विंटल पत्ती पैकिंग में और चार क्विंटल खुली ताजा चाय बरामद हुई थी। इसके अलावा डेढ़ किलो गुटखा और रैपर बरामद हुए थे। फैक्टी संचालक जितेंद्र ने बताया था कि वह अपने एक साथी सरोज कुमार के साथ मिलकर यह फैक्ट्री चलाता था।

प्रकरण में पुलिस ने कार्रवाई की थी और खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी नमूने लेकर जांच को भेज दिए थे। शुक्रवार को चाय की पत्ती की जांच रिपोर्ट आई तो सभी चौक गए। पता चला है कि मिलावटखोर फैक्ट्री संचालक चाय की पत्ती का बजन बढ़ाने के लिए उसमें लोहे के कण मिला रहे थे।

आरोपी एक किलो चाय की पत्ती में 700 मिली ग्राम तक लोहे के कण मिला देते थे। जबकि ऐसा करना सेहत के लिए हानिकारक होता है। लोहे को चाय की पत्ती में मिला देते थे ताकि तौल में पत्ती कम चढ़े। जांच में पता चला है कि इतनी ज्यादा मात्रा में लोहे के कण पत्ती में मिलाना असुरक्षित है।

पत्ती में पानी की मात्रा भी मानक से बहुत ज्यादा आई है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि चाय की पत्ती में लोहे के कण मिलाना हानिकारक है। ऐसा करने वालों के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में आपराधिक वाद दायर किया जाएगा। जिसमें आरोपियों को छह महीने की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है।

मिलावटखोरों पर हम लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। इसी क्रम में चाय की पत्ती का नमूना लेकर जांच को लखनऊ स्थित लैब में भेजा गया था। जांच में नमूना फेल हुआ है और असुरक्षित पाया गया है। अब आरोपियों के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में वाद दायर करने की तैयारी की जा रही है---चंद्रशेखर मिश्र, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा।

शरीर को ऐसे प्रभावित करता है ज्यादा आयरन
दरअसल, शरीर के सभी अंग सही तरह से काम करें, इसलिए आयरन जरूरी है। वहीं जब बॉडी में आयरन की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो यह टॉक्सिक का कारण बन सकता है। चिकिल्सकों के अनुसार हमारी बॉडी में हेप्सीडिन नाम का एक हार्मोन होता है, जो आयरन को रेगुलेट करने और इसे मेंटेन रखने का काम करता है. लेकिन जब हेप्सीडिन का लेवल बढ़ जाता है तो आयरन ज्यादा स्टोर होने लगता है। इसी तरह जब हेप्सीडिन का लेवल घटता है तब शरीर में आयरन की कमी होने लगती है, लेकिन कुछ डिसऑर्डर ऐसे हैं, जिनमें हेप्सीडिन का प्रोडक्शन बढ़ जाता है औऱ शरीर में आयरन ज्यादा बढ़ जाता है। जिससे समस्याएं बढ़ने लगती हैं।

लीवर डैमेज करता है ज्यादा आयरन
शरीर में अचानक से आयरन लेवल बढ़ने से कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं, जरूरत से ज्यादा आयरन सप्लीमेंट्स के सेवन से पाचन संबंधी समस्याएं होने लगती हैं और बच्चों को ये ज्यादा प्रभावित करता है। अगर लंबे समय तक ज्यादा आयरन शरीर में पहुंच रहा है तो लीवर डैमेज हो सकता है।

शरीर में ज्यादा आयरन होने से ब्रेन भी डैमेज हो सकता है। ज्यादा मात्रा में आयरन हेमोक्रोमेटोसिस कहलाता है इससे बॉडी ऑर्गंस और टिश्यू में आयरन बनाने लगता है। शरीर में ज्यादा आयरन होने से आर्थराइटिस, कैंसर, डायबिटीज, हार्ट फेलियर और लीवर की समस्याएं हो सकती हैं।

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