Kanpur News: आवाज देती जिंदगी, मगर अनसुना करते लोग… ईयरफोन बुझा रहा घरों का चिराग, बानगी है ये कुछ घटनाएं

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में लापरवाही में ईयरफोन बुझा रहा लोगों के घरों का चिराग।

कानपुर में लापरवाही में ईयरफोन लोगों के घरों का चिराग बुझा रहा। जबकि ट्रैफिक पुलिस लगातार जागरूक करती है।

कानपुर, [गौरव श्रीवास्तव]। सड़क पर चलते समय या रेलवे ट्रैक पार करते वक्त कान में इयरफोन लगाकर मोबाइल से बातें करना अथवा गाने आदि सुनना जिंदगी के लिए काल बनता जा रहा है। तमाम ऐसी घटनाओं हो चुकी हैं जिसमें मरने वाला कान में इयरफोन लगाए था।

हालात यह हो गए हैं कि कुछ प्वाइंट इस तरह के हादसों का क्षेत्र कहलाने लगे हैं। अभी दो दिन पहले ही सचेंडी के पांडेपुर क्रासिंग के पास रेल ट्रैक पर कान में इयर फोन लगा कर मोबाइल पर मैच देख रहे दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई थी। अब सवाल उठता है कि लोगों को अपनी जिंदगी को सुरक्षित रखना नहीं मालूम। कई घटनाएं हो चुकी है लेकिन कान में इयरफोन लगा कर चलने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। 

वाहन चालकों में कानों में ईयरफोन लगाकर ड्राइविंग करना एक फैशन बन गया है। ट्रैफिक नियमों को लेकर भी इनका चालान नहीं होता है। कान में ईयरफोन लगाकर गाने सुनते हुए अगल-बगल देखे बिना लोग रेलवे ट्रैक पार करते हैं। ऐसे में आए दिन किसी न किसी के घर का चिराग बुझ जाता है। अक्सर देखा गया है कि वाहन चालक ईयर फोन लगाकर बिन हॉर्न सुने आपके बगल से गुजर जाते हैं। इस कारण दूसरे वाहन चालकों को भी जान का खतरा बन जाता है। 

मस्ती की धुन में कहीं से भी मुड़ गए

रोड पर बाइक, कार चलाते समय या फिर रेलवे ट्रैक पार करते समय अलर्ट रहना चाहिए, कभी-कभी थोड़ी सी चूक चालकों के लिए घातक साबित हो सकती है लेकिन इसके बाद भी युवा पीढ़ी ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रही है। ट्रैफिक विभाग के निर्देशों की अनदेखी करते हुए युवा वाहन चालक हेलमेट के अंदर कान में ईयरफोन लगाकर वाहन चलाते है। वहीं अपनी ही मस्ती की धुन में युवा किसी भी समय कहीं से भी टर्न हो जाते है।

ट्रैफिक पुलिस जागरूक करती

ईयरफोन लगाने के कारण पीछे वाले चालक के हार्न बजाने के बाद भी उनको सुनाई नहीं देता है। इस कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और अधिकतर युवा वर्ग हादसे की चपेट में आकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इस लिए ट्रैफिक और पुलिस विभाग द्वारा खासकर स्कूल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जाता है। इसके बाद भी युवा पीढ़ी पर इसका खासा असर नहीं पड़ रहा है।

रेलवे के डेथ जोन: यहां सबसे ज्यादा हादसे

-गुमटी नंबर- कोकाकोला क्रॉसिंग, गोलचौराहे के नीचे, गुटैया व गीतानगर क्रासिंग, नौ नंबर क्रासिंग से दलहन अनुसंधान बाउंड्री तक, पनकी में इंडियन आयॅल के पास, दादानगर के पास झांसी लाइन दबौली के पास, रामादेवी चौराहे पर ओवरब्रिज के नीचे, मरे कंपनी पुल के नीचे, श्याम नगर में पीएसी के पास

बानगी ये कुछ घटनाएं :

-7 अक्टूबर को पनकी के रतनपुर गांव निवासी शीलू अग्निहोत्री की ईयरफोन लगाने से गुरुदेव क्रासिंग पर ट्रेन से कट कर मौत हो गई थी। 
-9 जनवरी को सचेंडी के ठाकुर का पुरवा निवासी बलवान सिंह ईयरफोन लगाकर गाने सुनते बाइक से नौबस्ता जा रहे थे तभी वृद्धा से टकराने पर मौत हो गई थी। 
-23 मार्च को अनवरगंज में जीशान नाम के युवक ईयरफोन लगाकर ट्रैक पार कर रहा था, तभी एलकेएम की चपेट में आने से मौत हो गई थी। 
-13 मार्च तो शिवराजपुर के संभरपुर का मजरा हिंदूपुर निवासी प्रशांत दीक्षित रामा मेडिकल कॉलेज में जनरेटर ऑपरेटर था। बिठूर की मंधना क्रासिंग पर ईयरफोन लगाने से मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत। 
-6 नवबंर को बीटेक स्टूडेंट घाटमपुर बहरौली गांव निवासी विकास रेलवे ट्रैक ईयरफोन लगाकर गाना सुनते जा रहा था। इसी दौरान ट्रेन की चपेट में आने से मौत। 

रेलवे में हैं कानूनन जुर्म

लापरवाही के कारण नियमानुसार ऐसा करना कानूनन जुर्म है। अमूमन रेलवे इस तरह के मामलों पर कार्रवाई करता नहीं है। रेलवे क्रासिंग बंद होने पर ही भी बेखौफ पैदल या दोपहिया वाहन निकालते हैं। या फिर कान में लीड लगाकर ट्रैक पार करते समय। रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत रेल की पटरियों को पार करने के अपराध में व्यक्ति को पकड़ा जा सकता है। ऐसा करते हुए पाए जाने पर व्यक्ति को छह महीने तक की सजा हो सकती है। वहीं एक हजार रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है। ऐसे में रेल प्रशासन लगातार वर्षों से लोगों को जागरूक करते हुए दुर्घटना से देर भली, जिंदगी मिलेगी न दोबारा जैसे स्लोगन जगह-जगह लिखती है, लेकिन इसके बाद भी लोग लापरवाही कर अपनी जान गवां रहे हैं। 

रेल ट्रैक पार करते वक्त ख्याल रखें

-जहां अधिकृत रेलवे क्रासिंग हो, उसी स्थान से पैदल व वाहन से पार करें।
-मानव रहित रेलवे फाटक में दोनों तरफ ट्रेन देखकर ही पटरी पार करें।
-ईयरफोन व मोबाइल कानों में लगाकर रेलवे क्रासिंग या पटरी पार न करें।
-रेलवे फाटक के कर्मियों को डरा धमका कर गेट खोलने को बाध्य न करें।
-रेलवे क्रासिंग पर सिग्नल लाल व बैरियर गिरा रहने पर बगल के रास्ते से ट्रैक पार न करें।

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