प्रयागराज : उत्तर प्रदेश सरकार को बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर बनाने की मिली अनुमति 

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को श्री बांके बिहारी कॉरिडोर के मामले में दायर याचिका पर फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को कॉरिडोर बनाने की अनुमति दे दी है। इसके साथ कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार तकनीकी विशेषज्ञों के साथ परामर्श के साथ कॉरिडोर बनाने के लिए जरूरी कदम उठा सकती है। इसके अलावा मंदिर तक पहुंचने के मार्गो (गलियों) पर अतिक्रमण हटाने के लिए भी उचित कदम उठा सकती है। हालांकि कोर्ट ने मंदिर के बैंक खाते में जमा धन 262.50 करोड़ रुपए का कॉरिडोर बनाने में उपयोग करने की सरकार को परमिशन नहीं दी है। इस फैसले के बाद यूपी सरकार मंदिर के आसपास पांच एकड़ में कॉरिडोर बनाएगी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने अनंत शर्मा, मधु मंगलदास और अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। 

कोर्ट ने गत 8 नवंबर को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार अपनी प्रस्तावित योजना के साथ आगे बढ़ सकती है। मगर यह भी तय करें कि दर्शनार्थियों को दर्शन में बाधा न आए और भक्तों के दर्शन पर किसी भी तरह से और किसी के द्वारा प्रतिबंध नहीं लगाया जाए। प्रशासनिक अधिकारियों को उपरोक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है और उल्लंघन के किसी भी कार्य की सूचना कोर्ट को उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्य रूप से कोर्ट ने कहा कि एक बार अतिक्रमण हटाने के बाद इन गलियों में दोबारा अतिक्रमण न हो और मंदिर के पहुंच मार्गों पर कोई बाधा न पहुंचे सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा। यह निर्देश वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में आने वाले तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन को लेकर दायर याचिका पर जारी किए गए हैं। 

कोर्ट ने अपने आदेश में मंदिर प्रबंधन में हस्तक्षेप के संबंध में कहा कि मंदिर में कई अप्रिय घटनाएं हुई हैं और देवता का उचित दर्शन भी सेवायतों की इच्छा पर निर्भर है। सेवायतों के दो संप्रदायों में अंतर के कारण भक्तों को प्रार्थना करने और पूजा करने में कठिनाई होती है। आदेश में आगे कहा गया कि मंदिरों, तीर्थ स्थलों जैसे अत्यंत महत्व के धार्मिक स्थान का उचित प्रबंधन सार्वजनिक क्षेत्र का विषय है। यह स्थान निस्संदेह धार्मिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के हैं, जो हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। लाखों लोग न केवल पर्यटन के लिए बल्कि धार्मिक मूल्यों के लिए, प्रेरणा लेने और अपनी भलाई के लिए भी इन स्थानों पर जाते हैं। कोर्ट ने कहां की संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में निहित सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिकता के सिद्धांतों के अनुसार राज्य सरकार को मंदिर परिसर और उसके आसपास सुविधाएं प्रदान करने के लिए कानून के अनुसार कार्य करना होगा। 

गौरतलब है कि मंदिर क्षेत्र को गलियारे के रूप में विकसित करने की योजना के लिए भक्तों द्वारा दर्शन और पूजा की सुविधा के लिए मंदिर के चारों ओर लगभग पांच एकड़ भूमि की आवश्यकता है जिसमें पार्किंग क्षेत्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के प्रावधान भी शामिल हैं। इस केस की अगली सुनवाई आगामी 31 जनवरी 2024 को होगी।

ये भी पढ़ें -Video : केनरा बैंक बिल्डिंग में लगी आग पर पाया गया काबू, फायर फाइटर्स ने कई लोगों को किया रेस्क्यू

संबंधित समाचार