बरेली: तापमान नहीं घटा तो कमजोर रह जाएगा मटर और चने का दाना

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Edited By Amrit Vichar
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फिलहाल गेहूं के लिए उपयोगी है वर्तमान मौसम, किसानों को सता रही चिंता

बरेली, अमृत विचार: सर्दी के मौसम में रबी की फसल पर ओस न पड़ने का असर दिखने लगा है। हालांकि किसानों को उम्मीद है पारा लुढ़केगा। विशेषज्ञ रबी फसल में नुकसान से बचाव के तरीके सुझा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ विजय चौहान बताते हैं कि जिले में रबी की फसल में सबसे अधिक पैदावार गेहूं की होती है।

पिछले दो साल से मटर और चना की खेती का दायरा भी बढ़ा है। इन दिनों इन फसलों को पानी के साथ ही कम तापमान की आवश्यकता लेकिन, वर्तमान में तापमान बढ़ा हुआ है। यदि तापमान नहीं घटा तो मटर और चने का दाना कमजोर हो सकता है।

रबी की इन फसलों के लिए अधिकतम तापमान 20 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20 से 12 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। आगामी दिनों में तापमान में गिरावट नहीं आती तो किसान फसल को पानी देने लगेंगे। इस स्थिति में पानी की समानांतरण व्यवस्था न होने पाने के चलते फसल को नुकसान होगा।

टपका विधि की सिंचाई कारगर साबित होगी: अगले सप्ताह से तापमान में गिरने की उम्मीद जता रहे कृषि विशेषज्ञ डा. हरीश गंगवार बताते हैं कि अधिकांश खेत समतल नहीं होते हैं। किसान जब पाइप से खेत में पानी देते हैं तो कहीं कम और कहीं पानी अधिक हो जाता है। ऐसे में फसल में जीवाणु उत्पन्न हो जाते हैं। यही जीवाणु चने और मटर की फसल की जड़ों में बीमारी पैदा कर उसे सड़ाने लगते हैं। इसलिए टपका विधि से ही काम होना चाहिए।

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