लखनऊ : एचआईवी संक्रमित महिला व पुरुष का जीवन हो रहा खुशहाल
केजीएमयू में 251 स्वस्थ बच्चों का हो चुका है जन्म, एचआईवी संक्रमित महिलाओं के आंचल में गूंज रही किलकारी
लखनऊ, अमृत विचार। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के चिकित्सकों की मेहनत एचआईवी संक्रमित दंपत्तियों के जीवन में खुशहाली ला रही है। बीते एक वर्ष में एचआईवी संक्रमित 51 दंपत्तियों के घर किलकारी गूंजी है। संक्रमित दंपत्तियों के 51 बच्चे विशेष निगरानी और इलाज के चलते पूरी तरह से स्वस्थ हैं। केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.डी हिमांशु के मुताबिक बच्चों की निगरानी अभी भी जारी है। यह सभी बच्चे एचआईवी संक्रमण से मुक्त हैं। वहीं करीब 7 सालों में अभी तक केजीएमयू में 251 बच्चों ने जन्म लिया है, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं।
डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक एचआईवी (ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है जो कि संक्रमित मानव शरीर में पाया जाता है। जो बाद में एड्स का कारण बनता है। उन्होंने बताया कि एचआईवी एड्स की एक अवस्था है जो कि मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। जो जीवन के लिए खतरनाक होता है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू एआरटी प्लस सेंटर आने पर सबसे पहले गर्भवती की सभी जांच होती है, बाद में उसका इलाज शुरू किया जाता है। एचआईवी ग्रसित गर्भवती महिलाओं के प्रसव के दौरान हर प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाता है। जिसमें प्रसव के तुरंत बाद नवजात को एक विशेष दवा दी जाती है। उन्होंने बताया कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद से लेकर तीन माह तक एचआईवी संक्रमण से बचाव की दवा देना बहुत जरूरी होता है। जब बच्चा 18 माह के करीब हो जाता है तब एचआईवी की पुष्टि के लिए एलाइजा टेस्ट भी किया जाता है जिससे संक्रमण मुक्त होने की जानकारी मिल सके। उससे पहले भी जरूरी जांचे समय- समय पर होती रहती हैं।
डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक संक्रमित दंपति घबराए नहीं, लेकिन डॉक्टरों की सलाह का पालन जरूर करें। ऐसा करने से बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है।
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