बरेली: फरियादी परेशान...समस्याओं की रैंकिंग बढ़ा रहा कागजी 'समाधान'

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Edited By Amrit Vichar
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अफसर कागजों का खेल जान गए... फरियादी भी असलियत पहचान गए

बरेली, अमृत विचार। कहने को जनसुनवाई पोर्टल मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी बताकर अफसरों को अक्सर पूरी गंभीरता से शिकायतों का निस्तारण करने की चेतावनियां जारी की जाती हैं, लेकिन ये मौखिक चेतावनी भी कागजों के उस खेल में निपट जाती हैं जो अफसर अच्छी तरह सीख गए हैं। शिकायतों के फर्जी निस्तारण के जिले में हैरान करने वाले मामले पहले भी थे और अब भी हैं। फरियादी भी समझ गए हैं कि आईजीआरएस पर शिकायत का मतलब उसके निस्तारण की गारंटी नहीं है।

आईजीआरएस की शिकायतों के फर्जी निस्तारण के मामले लगभग हर महीने सामने आते हैं। व्यवस्था के दावों और असलियत में सबसे बड़ा फर्क यही है कि ऐसे फर्जी निस्तारण पर सख्त कार्रवाई का कोई बड़ा उदाहरण जिले में नहीं है। पारदर्शी ढंग से शिकायतों के निस्तारण के दावे कर पूरा जोर बेहतर रैंक हासिल करने पर रहता है। ऑनलाइन पोर्टल पर जिन मामलों में रिपोर्ट लगाकर फरियादी के संतुष्ट हो जाने का दावा किया जाता है, असलियत यह है कि अफसर ज्यादातर मामलों में फरियादी से संपर्क तक नहीं करते। ऐसे मामले आम हैं, जब पीड़ितों को आईजीआरएस पर एक ही शिकायत कई-कई बार करनी पड़ती है।

अमृत विचार ने आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ितों से संपर्क किया तो कई हैरतअंगेज मामले सामने आए। करमपुर चाैधरी के अजय कुमार ने बताया कि मिनी बाईपास से मठ कमल नयन को जाने वाले रास्ते की हालत बहुत खराब है। करीब साढ़े छह सौ मीटर तक सड़क पर चलना मुश्किल है। बरसात में दिक्कत और बढ़ जाती है। कई इलाकों के लोग इस पर गुजरते हैं। कुछ दिन पहले उनका बेटा गिरकर चोटिल हो चुका है। उन्होंने आईजीआरएस पर शिकायत की तो अगले ही दिन समस्या के निस्तारण का मेसेज आ गया था। बोले- बताइए क्या इतनी जल्दी गिट्टी, तारकोल आकर सड़क बन सकती है। सड़क अब भी जैसी की तैसी है।

करगैना के अजय कुमार जौहरी ने बताया कि उनके इलाके में 83 मीटर सड़क बहुत खराब है। 10 साल से लोग परेशान हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। नाला और सड़क बनना बहुत जरूरी है। आईजीआरएस पर शिकायत करो तो गोलमोल जवाब दे दिया जाता है। आज तक कोई मौके पर सर्वे करने नहीं आया। पांच सौ मीटर की दूरी पर सांसद और विधायक का निवास है लेकिन किसी को परवाह नहीं है।सदर तहसील के गांव घघोरा पिपरिया की गीता देवी ने दो साल पहले मुख्यमंत्री आवास के लिए आवेदन किया था। उनके पति ओमप्रकाश ने बताया कि अब तक आवास नहीं मिला है। झोपड़ी में रहते हैं। एक बार फोटो खींचकर ले गए थे, लेकिन हुआ कुछ नहीं। कुल मिलाकर चार-पांच बार आवेदन किया है।

केस- 1
फरवरी के शुरुआती 22 दिनों में आईजीआरएस पोर्टल पर 44 सौ शिकायतें दर्ज हुईं जिनमें से 42 सौ को अफसरों ने महीना पूरा होने से पहले ही निस्तारित दिखा दिया। इस फर्जी निस्तारण की पोल तब खुली जब भारी संख्या में फरियादियों ने शिकायतों के निस्तारण से असंतुष्ट होने का फीडबैक दिया।

केस- 2
दिसंबर 2022 में तत्कालीन डीएम ने शासन में हुई शिकायत के बाद सिटी मजिस्ट्रेट से जांच कराई तो पता चला कि अफसरों ने तमाम शिकायतों को निस्तारित बता दिया लेकिन न मौके पर गए न पीड़ितों से बात की। इसके बाद दोबारा शिकायतों का निस्तारण करने का निर्देश दिया लेकिन अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई।

केस- 3
अक्टूबर 2023 में आईजीआरएस पर कोटेदार के खिलाफ हुई शिकायत पर नवाबगंज के पूर्ति निरीक्षक ने खुद जांच करके उसे क्लीनचिट दे दी। इससे पहले सीडीओ की ओर से कराई गई जांच में कोटेदार दोषी साबित हुआ था। ग्रामीणों ने पूर्ति निरीक्षक के फर्जीवाड़े के खिलाफ शासन में शिकायत की तब कहीं पोल खुली।

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