Kanpur News: अब क्यूआर कोड से बिजली समस्या का होगा निदान, UPSIDA ने किया ये...
कानपुर में यूपीसीडा ने 60 औद्योगिक क्षेत्रों के 30 हजार खंभों में क्यूआर कोड लगाएं।
कानपुर में यूपीसीडा ने 60 औद्योगिक क्षेत्रों के 30 हजार खंभों में क्यूआर कोड लगाएं। पनकी, रूमा, चकेरी आस-पास के जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में भी क्यूआर कोड लगना शुरू।
कानपुर, अमृत विचार। उप्र औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) अब क्यूआर कोड के जरिये औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की समस्या को दूर करेगा। प्राधिकरण ने पहली बार यूपी के औद्योगिक क्षेत्रों में क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया गया है।
पहले चरण में करीब 45 हजार बिजली के खंभों में क्यूआर कोड लगाया जाना है। जिसमें से अभी तक प्रदेश के 60 औद्योगिक क्षेत्रों के 30 हजार खंभों में क्यूआर कोड लगाए भी जा चुके हैं। वहीं, शहर के पनकी, रूमा, चकेरी, उन्नाव समेत आस-पास के जिलों में भी खंभों में क्यूआर कोड लगाने की शुरुआत हो गई है।
इसके तहत जिस खंभे में बिजली की दिक्कत होगी उसका क्यूआर कोड स्कैन करते ने के बाद समस्या का निस्तारण कराया जाएगा। इसके लिए डाटा सेंटर बनाया गया है। वहां एक-एक शिकायत सिस्टम पर दर्ज होगी।
यूपीसीडा क्यूआर सिस्टम को 153 औद्योगिक क्षेत्र में लागू करने जा रहा है। अब बिजली की समस्या का तुरंत निदान होगा। इसके तहत प्राधिकरण ने डाटा सेंटर बनाया है। वहां पर भी एक-एक शिकायत दर्ज होगी और कब निस्तारण हुआ ये भी पता चल सकेगा।
पहली व्यवस्था बिजली समस्याओं को लेकर शुरू गई है। इसके लिए फर्म को एलॉट किया गया है। अगर किसी भी खंभे में बिजली की समस्या होगी उसे समय पर सुधार नहीं किया गया तो फर्म को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया जाएगा। जिन खंभों में क्यूआर कोड लगाया गया है, उसमें फर्म का नाम, ठेकेदार का नाम, मोबाइल नंबर भी लिखा होगा।
जिस खंभें में दिक्कत होगी उसी के कोड की फोटो खींचकर पोल पर लिखे ठेकेदार के नंबर पर भेज देंगे। उसका तत्काल निस्तारण संबंधित ठेकेदार कराएगा।
प्राधिकरण ने अभी तक बंथर, अलीगढ़, सूरजपुर समेत 60 औद्योगिक क्षेत्रों में क्यूआर कोड लगाने का काम कर चुका है। शहर के साथ ही जैनपुर, रनिया, फतेहपुर में मलवा, ट्रांसगंगा सिटी, उन्नाव, फर्रुखाबाद में खिमसेपुर, हमीरपुर में भरुआ सुमेरपुर समेत कई औद्योगित क्षेत्रों में यह सुविधा होगी।
ऐसे काम करेगी सुविधा
खंभों व स्ट्रीट लाइट के लिए फर्मों के साथ तीन साल का सालाना रखरखाव शुल्क तय किया गया है। खंभों का क्यूआर कोड स्कैन करते ही जिम्मेदार फर्म का नाम, रखरखाव की अवधि, उसकी फीस व दो मोबाइल नंबर (यूपीसीडा के प्रबंधक व सहायक प्रबंधक का) सामने आ जाएंगे।
इस पर की गई शिकायत ठेकेदार के साथ यूपीसीडा के डाटा सेंटर में दर्ज होगी। औद्योगिक क्षेत्रों के मुख्य गेटों पर भी क्यूआर कोड होंगे। यहां से पूरे क्षेत्र की शिकायत हो सकेगी। पैनल सिस्टम की निगरानी अलग से होगी। एक पैनल से 40 खंभे जुड़े होते हैं। पैनल बंद होते ही सूचना यूपीसीडा के कस्टमर रिलेशन डाटा सेंटर पर पहुंच जाएगी।
हमने 60 औद्योगिक क्षेत्रों के 30 हजार खंभों में क्यूआर कोड लगाए हैं। पहले चरण में 45 हजार खंभे लगाए जाने का काम करना है। इस सुविधा से क्यूआर कोड की फोटो भेजते ही बिजली संबंधित समस्या का निस्तारण होगा। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली का संकट कम होगा। - मयूर महेश्वरी, सीईओ यूपीसीडा
