अयोध्या: तीन माह बाद पिता को याद आई बेटी, सौतेली मां हुई राजी, मासूम को मिली ममता की छाँव, जानें पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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अयोध्या, अमृत विचार। लगभग तीन माह तक की उहापोह के बाद आखिर बाप को अपना खून याद आया और वह अपनी मासूम पुत्री को वापस लेने के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पहुँच गया। समिति ने परिवार की काउंसलिंग के बाद इस शर्त के साथ मासूम को परिवार के हवाले किया है कि मासूम की सेवा-सुश्रुषा में कोई कमी नहीं होगी। 
 
गौरतलब है कि तीन माह पूर्व दो वर्षीय एक लड़की हनुमानगढ़ी मंदिर के पास लावारिश हाल में मिली थी। स्थानीय लोगों की सूचना पर थाना रामजन्मभूमि पुलिस और बाल कल्याण समिति ने मासूम के माता-पिता की तलाश और शिनाख्त की कवायद कराई लेकिन किसी सीसीटीवी फुटेज में इससे संबंधित कोई रिकार्डिग अथवा प्रत्यक्षदर्शी न मिलने के चलते बाल कल्याण समिति की ओर से मासूम को राजकीय शिशु गृह के संरक्षण में भेजवाया गया था। साथ ही मासूम के अभिभावकों की तलाश के लिए सोशल मीडिया व समाचार पत्रों के माध्यम से प्रयास जारी रखा। जिसके बाद मासूम का परिवार समिति तक पहुंच गया।
  
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सर्वेश अवस्थी ने बताया कि मासूम के पिता का कहना है कि उसकी पहली पत्नी उसका घर और बच्चे को छोड़कर चली गई।  इसके बाद उसने मासूम के पालन पोषण और घर गृहस्थी चलाने के लिए दूसरी शादी कर ली।

दूसरी पत्नी उससे झगड़ा कर अपने मायके चली गई तो वह मानसिक तनाव में आ गया और बच्ची को हनुमानगढ़ी के पास छोड़ आया। इस बीच पुत्री की उसको बहुत याद आती रही लेकिन दूसरी पत्नी के वापस आने के बाद ही वह समिति के पास आया। समिति की ओर पहली पत्नी को खोजवाने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता न मिली।  

सौतेली मां भी बच्चे के समुचित पालन पोषण के लिए राजी है, जिसके बाद लड़की को समिति सदस्य स्मृता तिवारी, सिद्धार्थ तिवारी, लल्लन प्रसाद अंबेश की उपस्थिति में इस शर्त के साथ परिवार के सिपुर्द किया गया है कि भविष्य में ऐसी पुनरावृति नहीं होगी। उन्होंने बताया कि उचित पालन पोषण के लिए अभी निगरानी कराई जाएगी और परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने का प्रयास होगा।

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