Banda News: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उतारी ट्रेन की आरती, लगाया भोग
समाजसेवियों ने रेल कर्मियों को सम्मानित कर निभाई ब्रिटिश काल की परंपरा
रेलवे प्लेटफार्म में झांसी-प्रयागराज पैसेंजर ट्रेन को फूल मालाओं से लादकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीद परंपरागत पूजा और आरती की गई और रेल कर्मियों को सम्मानित किया। मौजूद सैकड़ों नागरिकों ने ट्रेन का अभूतपूर्व स्वागत किया।
बांदा, अमृत विचार। रेलवे प्लेटफार्म में झांसी-प्रयागराज पैसेंजर ट्रेन को फूल मालाओं से लादकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीद परंपरागत पूजा और आरती की गई और रेल कर्मियों को सम्मानित किया। मौजूद सैकड़ों नागरिकों ने ट्रेन का अभूतपूर्व स्वागत किया।
सोमवार को नगर के कई लोग रेलवे स्टेशन पंहुचे। दोपहर करीब दो बजे झांसी-प्रयागराज जैसे ही प्लेटफार्म पर रुकी हाथ में बैनर लिए लोग इंजन के पास पंहुचे। इंजन को फूल-मालाओं से सजाकर अपना बैनर टांगकर आरती उतारी और नारियल फोड़कर पूजन किया। लोको पायलट राजेंद्र कुमार व सहायक लोको पायलट देव कुमार और गार्ड अभय सिंह को माला पहनाकर स्वागत किया। मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया।
स्वागत की अगुवाई कर रहे रामजी खेंगर व ललित खेंगर ने बताया कि ब्रिटिश काल में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे थी। तभी यह परपंरा शुरू हुई थी। उनके बाबा बिंदा प्रसाद व भोले बाबा ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। परंपरा के पीछे मान्यता यह थी कि 19वीं शताब्दी में रेल साधन शुरू होने पर सबसे पहले झांसी-प्रयागराज पहली ट्रेन के रूप में अतर्रा आई थी।
स्टेशन मास्टर रामनरायण कुशवाहा को भी माला पहनाकर मुंह मीठा कराया। इस दौरान बृजेश खेंगर, अरविंद पटेल, राजा अलबेला, त्रिभुवन सिंह, राजेंद्र चैरसिया, राजाभइया, मनीष खेंगर, जगदीश गुप्ता विक्की, कैलाश बाजपेयी आदि मौजूद रहे।
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