Special Story : राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने का सपना अधूरा, खिलाड़ियों को नहीं मिलीं सुविधाएं
हैंडबाल बालक-बालिका टीमों ने किया निराश, कुश्ती में भी स्वर्ण को तरसे
मुरादाबाद,अमृत विचार। वर्ष 2023 में तीन दिन शेष हैं। लेकिन, मंडल की टीम को स्वर्ण पदक विजेता बनते देखने का सपना अधूरा ही रह गया। सोनकपुर स्टेडियम में आयोजित हुई तीन स्पर्धाओं में हारकर टीम बाहर हो गई। इसके बाद भी स्टेडियम में व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं। अब नए साल में कुछ उम्मीदें हैं। अगर सुविधाएं सुधारी गईं तो टीम को विजेता बनने का सपना पूरा हो सकता है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्पोर्ट्स स्टेडियम में मंडल भर के खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। यहां 10 से भी ज्यादा खेलों के खिलाड़ी सुनहरे भविष्य को तलाश के लिए परीना बहा रहे हैं। लेकिन, स्टेडियम में पर्याप्त सुविधाएं न मिलने से राज्य स्तर की प्रतियोगिता में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन निराशाजनक रहता है। साल की शुरुआत में राज्य स्तरीय हैंडबाल बालिका वर्ग प्रतियोगिता की मेजबानी स्टेडियम ने की थी। इसमें टीम लीग मैच हारकर प्रतियोगिता से बाहर हुई।
इसके बाद स्टेडियम ने राज्य स्तरीय कुश्ती बालिका वर्ग की मेजबानी की। इसमें मंडल टीम एक स्वर्ण तक नहीं जीत पाई। इसके बाद नवंबर में हैंडबाल बालक वर्ग राज्य स्तरीय प्रतियोगिता की मेजबानी भी स्टेडियम के पास थी। इसमें भी टीम लगातार तीन मैच हारकर लीग मैच से बाहर हुई। बालिका वर्ग की हॉकी टीम राज्य स्तर प्रतियोगिता के लिए दिसंबर में लखनऊ गई। यहां टीम ने लीग मैच में अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन, सेमीफाइनल में मेजबान लखनऊ से 6-0 अंकों के अंतर से हार मिली। स्टेडियम की टीम विभिन्न मौके पर निराश कर रही है। यह साल भी टीम से अच्छे प्रदर्शन करने की उम्मीद में निकल गया। उम्मीद है कि आने वाले समय में टीम अच्छा करेगी।
छोटा है मैदान, अभ्यास करने वाले अधिक
सोनकपुर स्टेडियम में काफी असुविधाएं हैं। इस साल स्मार्ट सिटी योजना के तहत पांच करोड़ रुपये की लागत से स्टेडियम का सौंदर्यीकरण कराया गया। फिर भी धरातल पर स्थितियां काफी खराब हैं। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता है। एक ही मैदान में हैंडबॉल, एथलेटिक्स, क्रिकेट खिलाड़ी, खो-खो, बाक्सिंग, फुटबॉल समेत अन्य खेलों के खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। खिलाड़ियों की संख्या अधिक होने से वे अभ्यास नहीं कर पाते हैं। इसका असर खेल पर पड़ता है।
मैदान पर गड्ढे, अभ्यास करने में होती है दिक्कत
स्टेडियम के मैदान पर काफी गड्ढे हैं। फुटबॉल मैदान में कुछ जगहों पर घास उग आई है तो कहीं इसका नाम तक नहीं है। फुटबॉल नेट के पास जहां कीपर खड़ा होता है, वहां घास नहीं उगी है। यहां कंक्रीट की भरमार है। इससे खिलाड़ियों को अभ्यास करने में काफी परेशानी होती है। हॉकी खिलाड़ी भी मैदान पर पर्याप्त घास न होने से अभ्यास में मुश्किल का सामना करते हैं। क्रिकेट पिच का हाल भी ऐसा ही है। इस पिच में बिल्कुल बाउंस नहीं है। जिससे गेंदबाजी में परेशानी होती है। बल्लेबाज भी सपाट पिच पर खेलकर अच्छा महसूस नहीं करते हैं। एथलीट जिस ट्रैक पर दौड़ लगाते हैं उसमें गड्ढों की भरमार है। इससे खिलाड़ियों को चोटिल होने का खतरा बना रहता है।
इस साल स्टेडियम में स्मार्ट सिटी के तहत सौंदर्यकरण का काम चल रहा था। इसमें खिलाड़ियों को थोड़ी परेशानी हुई। लेकिन, अब यहां काम पूरा हो चुका है। स्टेडियम में सभी सुविधाएं खिलाड़ियों को दी जा रही है। जहां पर कंक्रीट या अन्य कोई परेशानी है। उस पर काम कराया जाएगा। जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास में कोई परेशानी न हो। -प्रेम कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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