नैनीताल: प्रधान बंदीरक्षक की पदोन्नति मामले में 4 माह के भीतर निर्णय लें : हाईकोर्ट
विधि संवाददाता, नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गृह सचिव से याची 'प्रधान बंदी रक्षक' की पदोन्नति के प्रत्यावेदन पर चार माह के भीतर निर्णय लेने को कहा है । मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ में हुई ।
रुड़की जेल के प्रधान बंदीरक्षक सुरेंद्र सिंह राणा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि राज्य गठन से पूर्व उनकी नियुक्त बंदीरक्षक पद पर हुई थी। बाद में उनकी पदोन्नति प्रधानबंदी रक्षक पद पर हुई। अब उनकी 31 वर्ष की सेवा हो चुकी है।
नियमानुसार उनको 24 साल सेवा के बाद डिप्टी जेलर पद पर पदोन्नत होना था। नियुक्ति के समय डिप्टी जेलर के पद पर 50 फीसदी पदोन्नति का नियम था। राज्य सरकार ने 2015 में इसे घटाकर 25 फीसदी कर दिया। शेष पदों में सीधी भर्ती होनी है। सरकार का यह निर्णय उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन विधेयक की धारा 74 के भी विपरीत है ।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में याची से एक नया प्रत्यावेदन गृह सचिव को देने को कहा है जिस पर गृह सचिव 4 माह के भीतर निर्णय लेंगे। इसी के साथ याचिका निस्तारित कर दी गई है ।
