बरेली: ठगों के शिकार बड़े-बड़े अफसर... कहें तो कहें क्या और करें तो करें क्या

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Edited By Amrit Vichar
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अधिकारियों की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर परिचितों को चूना लगा रहे हैं साइबर ठग, शिकार होने वालों में ज्यादातर रिटायर्ड अफसर

बरेली, अमृत विचार। साइबर ठगों के हथकंडों से सतर्क रहा जाए, बचाव का इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है। ये ठग पुलिस की क्षमताओं से इतने आगे निकल चुके हैं कि ठगी के बाद उनका पकड़ में आना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन जैसा हो गया है। अब तो खुद बड़े-बड़े अधिकारियों को भी साइबर ठग अपनी जालसाजी का शिकार बनाकर पुलिस को सीधी-सीधी चुनौती दे रहे हैं लेकिन फिर भी सुरक्षित हैं। अफसरों का भी साइबर ठगों पर कोई खास जोर नहीं चल पा रहा है।

कुछ ही दिन पहले साइबर ठगों ने आईजी बरेली रेंज डॉ. राकेश सिंह की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उनके परिचितों से पैसों की मांग शुरू कर दी। कुछ परिचितों के जरिए यह मामला जानकारी में आने के बाद उन्हें फेसबुक पर संदेश जारी कर अपने परिचितों को आगाह करना पड़ा कि अगर कोई फेसबुक के जरिए उनके नाम से पैसों की मांग करे तो उसे पैसे न दें। कोई मेसेज आए तो उसका स्क्रीन शॉट और यूआरएल उन्हें जरूर भेजें। आईजी की इस अपील के बाद भी उनके नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाने वाला ठग नहीं पकड़ा गया। कुछ दिन पहले इसी तरहउत्तराखंड के भी एक रिटायर्ड आईजी को साइबर ठगों ने शिकार बनाया था, उनके कई परिचितों से पैसे भी झटक लिए लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर सकी।

बरेली के एसएसपी रह चुके अखिलेश चौरसिया की भी फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर साइबर ठगों कई लोगों को ठगा। लखनऊ के अलीगंज में रहने वाले उनके परिचित वकील हरीश चौरसिया को 40 हजार रुपये की चोट लगी। हरीश के मुताबिक उनके पास अखिलेश चौरसिया की फेसबुक आईडी से मैसेंजर पर मेसेज आया था जिसमें सीआरपीएफ के अधिकारी आशीष कुमार को दोस्त बताते हुए कहा गया था कि आशीष का तबादला कानपुर से जम्मू कश्मीर हो गया। वह अपनी घरेलू उपयोग का वस्तुएं बेचना चाहते हैं। हरीश के दिलचस्पी दिखाने पर कथित आशीष ने उनसे बात की और सौदा तय कर 40 हजार रुपये अपने अकाउंट में डलवा लिए। कुछ दिन पहले साइबर ठगों ने आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप के नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उनके परिचितों ठगने की कोशिश की थी।

सस्ते में मिल रहा है सामान... इस झांसे से बचकर रहें
अफसरों के नाम से ठगी करने वालों का प्रमुख हथकंडा सस्ते में घरेलू सामान खरीदने का होता है जिसमें लोग आसानी से फंस जाते हैं। साइबर ठग किसी बड़े अधिकारी का नाम-फोटो और ब्योरे का इस्तेमाल कर उसकी फर्जी फेसबुक आईडी बनाते हैं और फिर मैसेंजर पर उसके परिचितों को संदेश भेजते हैं कि उनके परिचित किसी अधिकारी का कहीं दूर ट्रांसफर हो गया है और वह अपना घरेलू सामान सस्ते में बेच रहा है। बड़े अफसरों के नाम पर ठगी की ज्यादातर घटनाएं इसी बहाने हुई हैं। पुलिस अफसरों का कहना है कि फर्जी फेसबुक आईडी बनाने वाले ठग सबसे ज्यादा यही झांसा देते हैं लिहाजा कभी भी मोबाइल पर ऐसा मेसेज आए तो सावधान हो जाना चाहिए।

बड़े अफसरों के फर्जी अकाउंट से लगातार ठगी, रिटायर्ड अधिकारी हो रहे सबसे ज्यादा शिकार
साइबर ठग लंबे समय से बड़े अधिकारियों के नाम के फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर इस तरह की ठगी कर रहे हैं। इन अधिकारियों में भी पुलिस के अधिकारी ज्यादा हैं और वह भी रिटायर्ड। उत्तराखंड के एक रिटायर्ड आईजी का फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर उनके कई परिचितों को इसी बहाने चूना लगाया गया। साइबर एक्सपर्ट्स भी अब तक कोई तरीका नहीं ढूंढ पाए हैं कि ठगी की इन घटनाओं को रोका जा सके। ऐसे मामलों में ठगी के शिकार हुए अफसर न कुछ कर पा रहे हैं, न कुछ कह पा रहे हैं।

अगर कोई सस्ते में सामान दिलाने की बात कहता है तो फौरन सावधान हो जाएं। वह सामान चोरी का होगै या फिर ऑफर देने वाला साइबर ठग होगा। उसके दस्तावेज मांगेंगे तो वह खुद फोन करना बंद कर देगा। अधिकारियों के नाम से फेसबुक पर मेसेज भेजकर पैसे मांगे जाएं तो आधिकारिक वेब साइट पर शिकायत करें। संभव हो तो अधिकारी और उनके स्टाफ को भी जानकारी दें ताकि आप ठगी का शिकार न हों और पुलिस साइबर ठग को जल्द गिरफ्तार कर सके। - अनुज अग्रवाल, साइबर एक्सपर्ट

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