बरेली: अपनी ही सरकार में व्यापारी परेशान.. कैसे हो समस्या का निदान

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। लोकसभा चुनाव नजदीक है। व्यापारियों को लेकर तमाम घोषणाएं की जा रही हैं लेकिन व्यापारी जीएसटी विभाग के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) साफ्टवेयर की ओर से वर्ष 2017-18 और 2018-19 में दाखिल रिटर्न में गड़बड़ी के भेजे गए नोटिस से परेशान हैं। इनमें कई व्यापारी तो भाजपा की किसी न किसी इकाई से जुड़े हुए हैं।

व्यापारियों का कहना है यह साफ्टवेयर विभाग के लिए कमाई और व्यापारियों के लिए सिरदर्द है। 44 हजार कारोबारियों को नोटिस आ चुका है, जबकि इनमें अधिकांश लाखों रुपये का रिटर्न जमा कर सरकारी खजाना भर रहे हैं।

तमाम व्यापारियों का आरोप है कि सरकार उनको हर संभव मदद का आश्वासन देती रही है, लेकिन अब अपने ही वादों को भूल रही है। अफसर तो केवल ट्रिपल आईआईटी के सहयोग से मुख्यालय पर विकसित एआई साफ्टवेयर से जीएसटी रिटर्न और वार्षिक जीएसटी रिटर्न में मिले अंतर के आधार पर नोटिस भेजने की बात कह पल्ला झाड़ रहे हैं।

तर्क दिया जा रहा है अगर व्यापारी को नोटिस सही प्रतीत नहीं होता तो वह इसे ऑनलाइन भी दुरुस्त करा सकता है। तमाम, व्यापारियों को इस बात का भी मलाल है कि जिले के तमाम व्यापारिक संगठन भी केवल राजनीति तक सीमित हैं।

समाधान कम मैनेज करने पर रहता है फोकस
शहर के कई बड़े व्यापारियों ने नाम नहीं छापने की गुजारिश पर बताया कि उनको भी विभाग की ओर से रिटर्न जमा करने के लिए नोटिस मिल चुके हैं। किसी पर एक लाख तो बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी भी हैं जिनको कई लाख रुपये कर बकाया का नोटिस मिल चुका है। आरोप है कि जीएसटी विभाग में इन नोटिसों की आड़ में मैनेज करने का बड़ा खेल चल रहा है। कुछ खंडों के अधिकारी अपने कर्मचारियों के जरिए कार्यालय बुलाते हैं और फिर यहां नोटिस में रकम देखकर उसके हिसाब से समस्या का निस्तारण करने की बात कहते हैं।

ट्रांसपोर्ट का जीएसटी विभाग में पंजीकरण करा रखा है। सारा कारोबार नंबर एक में है। कुछ खामियों की वजह से लाखों रुपये बकाया का नोटिस भेजा गया, जबकि जिले में 95 फीसदी ट्रांसपोर्ट्स ऐसे हैं जिन्होंने जीएसटी या परिवहन विभाग में पंजीकरण ही नहीं कराया है। विभाग को चाहिए इन पर भी शिकंजा कसे ताकि सरकार का खजाना भर सके।
- आशु अग्रवाल,व्यापारी

छह साल बाद रिटर्न मिसमैच को लेकर व्यापारियों को नोटिस भेजना सीधे तौर पर उनका उत्पीड़न करने जैसा है। हमारा संगठन व्यापारियों की इस समस्या को लेकर जीएसटी के अफसरों से दो बार मिल चुका है। शीघ्र सीएम के समक्ष इस समस्या का रखेंगे।
- विकास अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल

हमारा संगठन राजनीति से जुड़ा नहीं है। पिछले महीने व्यापार मंडल के प्रांतीय अधिवेशन में अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा ने स्वयं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के समक्ष व्यापारियों की इस समस्या को प्रमुखता से रखा था।
-राजेंद्र गुप्ता, प्रांतीय महामंत्री, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल

जब जीएसटी लागू हुआ था तब उस समय की छोटी-छोटी गलतियों पर छह साल बाद नोटिस भेजना गलत है। विभाग में किसी तरह की सुनवाई नहीं होना सबसे बड़ी समस्या है। सीए से संपर्क किया तो कहा कि विभाग में मैनेज करना बेहतर ही बेहतर विकल्प है।
-जीतू, ठेकेदार

सरकार को चाहिए छोटी-छोटी मामूली त्रुटि और अंतर के लिए अनावश्यक परेशान न किया जाए। तमाम व्यापारी जीएसटी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। अफसरों के पास कोई समाधान नहीं। भागदौड़ के चलते सबसे ज्यादा परेशानी छोटे व्यापारियों को हो रही है।
- रामकृष्ण शुक्ला, महानगर अध्यक्ष, व्यापारी सुरक्षा फोरम

मुख्यालय पर एआई साफ्टवेयर ने व्यापारियों के दाखिल रिटर्न की जांच में कमियां पकड़ी हैं। नोटिस से व्यापारियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर, संबंधित खंड के अधिकारी नहीं सुन रहे हैं तो वह उनके पास शिकायत करें, तत्काल समस्या का निदान कराया जाएगा।-ओम प्रकाश चौबे, जीएसटी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1

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