पीलीभीत: रामलला की अलख जगाने उमेश चंद्र गंगवार ने जीप से घर-घर पहुंचाई थी राम ज्योति
13 अक्टूबर 1992 को पुलिस ने उनके समेत 11 कार सेवकों को कर लिया गिरफ्तार
पीलीभीत, अमृत विचार। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले वैसे तो तमाम नायक तराई ने दिए। रामशिला पूजन, राम ज्योति घर-घर पहुंचाना या फिर अन्य। बरखेड़ा क्षेत्र से भी कारसेवक उत्साहित होकर रामलला की अलख जगाने के लिए जिम्मेदारी संभाले हुए थे।
इसी आंदोलन में सक्रियता के बाद कस्बे के ही डॉ.परशुराम गंगवार 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सांसद चुने गए थे। हालांकि अब उनका निधन हो चुका है। इसके अलावा भी क्षेत्र के तमाम राम भक्तों को उस वक्त जेल जाना पड़ा था। उन्हीं में से एक उमेश चंद्र गंगवार भी रहे। अब 22 जनवरी को होने जा ही रामलला की अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उनका व साथी कार सेवकों का परिवार संघर्ष को ऐतिहासिक बनता देख उत्साहित है।
मूल रूप से बरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम रंपुरा नत्थू के रहने वाले उमेश चंद्र गंगवार नब्बे के दशक में भाजपा के मंडल अध्यक्ष हुआ करते थे। उस वक्त उनकी उम्र करीब 30 वर्ष थी। उन्होंने बताया कि जब श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन शुरू हुआ, उनके साथ ही अन्य कारसेवक उत्साहित हो उठे थे। पुलिस के सख्त पहरे के बावजूद राम नाम की अलख जगाते रहे। कोई साइकिल पर सवार होकर निकल जाता था तो कोई पैदल। उनके पास एक जीप हुआ करती थी।
इसी पर साथियों संग सवार होकर वह क्षेत्र में निकल जाया करते थे। राम ज्योति को घर-घर पहुंचाते रहे। 13 अक्टूबर 1990 का दिन था। उस वक्त पुलिस को उनकी टीम के बारे में काफी जानकारी लग चुकी थी। क्षेत्र के ग्राम रायपुर, मचवाखेड़ा, गाजीपुर होते हुए राम ज्योति बांटकर लौट रहे थे। इसी बीच उनकी गिरफ्तारी पुलिस ने कर ली। कुल 13 लोंगों की एकसाथ गिरफ्तारी की गई थी।
पहले कुछ दिन पीलीभीत की जेल में बिताए। इसके बाद बदायूं जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। करीब डेढ़ माह बाद सभी को रिहाई मिल सकी थी। रामलला की सेवा का फल भी मिला। 1995 में जिला सहकारी बैंक के डायरेक्टर बनाए गए। 2000 में जिला पंचायत सदस्य भी बने। इसके अलावा भाजपा के जिला उपाध्यक्ष, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भी रहे। अब उनका कहना है कि 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का दिन उन सभी कार सेवकों और उनके परिवारों के लिए खास है। किसी पर्व से कम नहीं है। इसे भव्य तरीके से रामलला की भक्ति में मनाया जाएगा।
1992 में कारसेवा के लिए गए थे अयोध्या
उमेश चंद्र गंगवार का कहना है कि राम ज्योति घर -घर पहुंचाते हुए गिरफ्तारी के बाद डेढ़ माह जेल में बिताए। इसके बाद पुलिस ने निगरानी और बढ़ा दी थी। मगर वह दौर ऐसा था कि राम भक्तों की आस्था के आगे की जा रही सख्ती भी बेअसर थी। लगातार सक्रिय भागीदारी उनके साथ ही अन्य तमाम कार सेवक निभाते रहे। छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में ही रहे। उनका कहना है कि अब करीब तीन दशक से अधिक समय बाद कार सेवकों का संघर्ष ऐतिहासिक बनता दिखाई दिया है। यह गर्व की बात है।
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