लखीमपुर खीरी: मंडी समितियों ने राजस्व वसूली में पिछले वर्ष के आंकड़ों को छोड़ा पीछे
खरीफ फसलों का अच्छा उत्पादन होने से मंडी शुल्क में हुई वृद्धि
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। मंडी समितियों ने वर्ष 2023-24 में लक्ष्य के सापेक्ष मंडी शुल्क के तौर पर राजस्व वसूली करके पिछले वर्ष के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि वित्त वर्ष के पूरे होने में अभी तीन माह शेष हैं, लेकिन अभी तक नौ माह में 2015.14 लाख रूपये मंडी शुल्क की प्राप्ति की है। जबकि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में इस अवधि में 1658.47 लाख रूपये मंडी शुल्क वसूला गया था। मंडी शुल्क में वृद्धि होने के कारणों में माना जा रहा है कि खरीफ फसलों का अच्छा उत्पादन होने से मंडियों में धान की आवक में वृद्धि हुई है, जिससे मंडी शुल्क बढ़ा है।
जनपद में कुल छह मंडी समितियां लखीमपुर, गोला, पलिया, तिकुनिया, मोहम्मदी और मैगलगंज संचालित हैं। सभी छह मंडियों को 2023-24 में 2882.90 लाख रूप्ये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य मिला है, जबकि पिछले वर्ष 2022-23 में वार्षिक लक्ष्य 2405.41 लाख रूपये था। इसमें भी मंडीवार अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें लखीमपुर को सबसे अधिक 1139 लाख, मोहम्मदी को 322.55 लाख, गोला गोकर्णनाथ को 632.50 लाख, पलिया को 301.20 लाख, मैगलगंज को 212.35 लाख, तिकुनिया को 275.30 लाख कुल 2882.90 लाख रूपये राजस्व वसूली का लक्ष्य मिला है।
चालू वित्त वर्ष के नौ माह अप्रैल से दिसंबर तक माहवार निर्धारित क्रमिक लक्ष्य प्राप्त करने में लखीमपुर, मोहम्मदी, गोला, मैगलगंज और तिकुनिया मंडी शत प्रतिशत अव्वल रही हैं। जबकि पलिया मंडी लक्ष्य के सापेक्ष 79 प्रतिशत ही मंडी शुल्क वसूल पाई है। इस प्रकार वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष सभी छह मंडियों ने अब तक 69.90 प्रतिशत मंडी शुल्क प्राप्त किया है।
धान का रेट और खांडसारी के अच्छे उत्पादन से बढ़ा मंडी शुल्क
मंडी शुल्क में पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष अच्छी राजस्व वसूली के लिए दो फैक्टर अहम रहे। पहला तो मंडियों में धान के रेट पिछले साल के मुकाबले अधिक रहे, जिस कारण मंडी शुल्क में वृद्धि हुई। पिछले वर्ष धान 1300 से 1600 रूपये प्रति क्विंटल तक बिका था, जबकि इस वर्ष 1500 से 1900 रूपये प्रति क्विंटल तक रेट रहा। दूसरा खांडसारी इकाईयों के उत्पादन में वृद्धि हुई है, जिससे मंडी समितियों को गुड़, शक्कर उत्पादों से अच्छा मंडी शुल्क मिला है।
जिले की सभी छह मंडियों को पिछले वर्ष से करीब 4.50 करोड़ अधिक राजस्व वसूली की लक्ष्य मिला है, जिसके सापेक्ष अभी तक करीब 70 प्रतिशत राजस्व वसूली की गई है। शेष तीन महीनों में लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा करने की उम्मीद है। इस वर्ष मंडी में धान अच्छे रेट पर बिका, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई। वहीं खांडसारी इकाईयों का उत्पादन अच्छा होने से मंडी शुल्क में इजाफा हुआ है- सुधांशु कुमार, मंडी सचिव, लखीमपुर।
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