IIT Kanpur से पीएचडी कर रही छात्रा ने दी थी जान, उड़ीसा से कानपुर पहुंचे परिजन, बेटी के शव को कफन से लिपटा देख फफक पड़े
कानपुर आईआईटी में एक माह के अंदर तीन छात्र-छात्राओं ने फांसी लगाकर दी जान।
कानपुर आईआईटी में एक माह के अंदर तीन छात्र-छात्राओं ने फांसी लगाकर जान दी। वहीं, शुक्रवार को उड़ीसा से कानपुर के पोस्टमार्टम हाउस परिजन पहुंचे। जहां बेटी के शव को कफन से लिपटा देख उनके होश उड़ गए।
कानपुर, अमृत विचार। आईआईटी में एक माह में तीसरी पीएचडी की छात्रा प्रियंका जायसवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या के मामले के बाद हर कोई सन्न रह गया है। घटना के बाद दूसरे दिन शुक्रवार को झारखंड के दुमका जिले से मृतक छात्रा के माइनिंग इंजीनियर पिता नरेंद्र जायसवाल, मां ज्योतसना, छोटी बहन लिपि अन्य परिजनों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंची।
बेटी का शव देखते हुए मां कुछ देर के लिए बेसुध हो गई। मैंगलोर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही छोटी बहन ने तुरंत मां को संभाला। दोनों करीब एक घंटे तक जमीन पर प्रियंका का चेहरा सहलाती रहीं। इसके बाद पिता पुलिस के साथ पहुंचे तो शव देखते ही रुंधे गले से बोले कि डेढ़ घंटे बात हुई थी, तब भी कुछ नहीं बताया। मां फफक हुए बोलीं सब कुछ ठीक था तुमने ये कदम क्यों उठा लिया।
बेटा इतनी कमजोर क्यों निकल गई
मां फफककर बोली कि हाय बेटा तुम इतनी कमजोर क्यों निकल गई। घटना के बाद पूरी रात रोने की वजह से सूखी आंखों आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मां बोली बेटा प्रियंका उठो...सुबह हो गई है…लिपि ने हाथों से प्रियंका के कान बंद करते हुए कहा कि कहीं दीदी को सर्दी न लग जाए। इसलिए दोनों से कान बंद कर लेती हूं।
इसके बाद 29 साल की जितनी यादें परिजनों के जेहन में थीं, सारी परतें एक एक कर खुलने लगीं। कभी हाईस्कूल झारखंड से करना तो कभी इंटर दिल्ली के डीपीएस से करने की बातें सामने आने लगीं। फिर कोटा, आईआईटी रोपड़, तमिलनाडु और उसके बाद कानपुर आने तक की यादों के पन्ने आंसुओं के साथ पलटते रहे।
मेरा बेटा सो रहा है, साइकलिंग के समय उठा दिया जाएगा
आईआईटी छात्रा प्रियंका के पिता माइनिंग इंजीनियर नरेंद्र जायसवाल परिजनों के साथ सुबह नौ बजे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो बैग में शव देखकर सिर पकड़ लिया। इसके बाद कुछ देर बाद बोले कि मेरा बेटा सो रहा है। साइकलिंग का समय होने पर उसे उठा दीजिएगा।
कुछ देर बाद सुध संभाली तो ये जाना कि बेटी ने आत्महत्या कर ली है है। प्रियंका पिता की बहुत दुलारी थी। पिता बार-बार पोस्टमार्टम हाउस के अंदर बाहर बैठे नहीं वह अंदर से भड़भड़ाकर चक्कर अंदर बाहर चक्कर लगाते नजर आए। वहीं मां कभी प्रियंका का चेहरा साफ करतीं तो कभी उसके गले पर पड़े निशान को देखती और फिर फफक कर रो पड़तीं। देवी...ये तुमने क्या किया? बेटी तूने ये कदम क्यों उठाया?
तू तो मेरी बहादुर बेटी थी। वहीं, पिता शव का चेहरा देखकर उसे उठाने की कोशिश कर रहे थे। उनका कहना था कि ऐसी कौन सी बात थी, जो तुमने हम लोगों से छिपा रखी। वहीं इस दौरान छोटी बहन लिपि बड़ी बहन प्रियंका के पूरे शरीर का वीडियो बनाती दिखाई दी। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है। परिवार वालों ने देर शाम भैंरों घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों ने बताया कि शनिवार सुबह बेटी की अस्थियां लेंगे और झारखंड निकल जाएंगे।
डेढ़ घंटे की पापा से बात, ऑनलाइन खरीदी थी रस्सी
पिता नरेंद्र जायसवाल के अनुसार प्रियंका ने जान देने के लिए कोई तुरंत नहीं सोचा होगा। अगर उसने ऑनलाइन रस्सी आर्डर करके मंगवाई थी। जो वह योजना तैयार कर रही थी। कोई न कोई ऐसी बात जरूर थी जो उसे अंदर ही अंदर खाई जा रही थी। उन्होंने बताया कि बुधवार शाम को डेढ़ घंटे तक हंस हंस कर बात की और कुछ ही दिनों में व्यवस्थित होने की बात कही थी। प्रियंका ने मंगलवार को ऑनलाइन रस्सी खरीदी थी। एक मोटी रस्सी खरीदी थी और दूसरी रस्सी कपड़े फैलाने के लिए ली थी। नरेंद्र ने बताया कि काफी देर बाद उन्होंने खुद ही मेस बंद होने की बात कहते हुए फोन काट दिया था।
स्वास्थ्य को लेकर संजीदा थी प्रियंका
प्रियंका अपने स्वास्थ्य को लेकर भी बहुत संजीदा थी। परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि वह डायबिटिक थी और ब्लड प्रेशर भी रहता था। वह लगातार इन बीमारियों की दवा भी ले रही थी। 28 को जब पिता उसे लेकर झारखंड से चले और 29 को पहुंचे तो उसने अपनी मर्जी से पिता से साइकिल खरीदवाई थी। साइकिल यही कहकर ली गई थी कि कुछ वेट कम होगा तो शुगर और डायबिटीज भी कम होगी।
