बरेली: भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र...शाम होते ही अंधेरा, नालों में उफना रही गंदगी, बिजली में मनमानी
अफसरों के आश्वासन दावों और वादों तक सीमित, उद्यमी मुश्किल हालातों में दशकों से चला रहे उद्योग
बरेली, अमृत विचार। प्रदेश में औद्योगिक विकास की तमाम कोशिशें की जा रही हैं। फलस्वरूप जिले में भी एक साल में कई नई औद्योगिक इकाइयां लग चुकी हैं। उद्यमियों ने व्यवस्था को लेकर वादों और दावाें पर भरोसा कर उद्याेग तो लगा लिए लेकिन अब सुविधाओं के नाम पर खुद को छला महसूस कर रहे हैं। सड़कें जर्जर हैं तो कहीं नाले चोक हो गए हैं। बिजली सप्लाई भी रामभरोसे है। अधिकारियों के साथ बैठकों में मुद्दे उठते हैं तो अतिशीघ्र समाधान के आश्वासन का पैंबद लगाकर उद्योगों को पूरी रफ्तार से चलाने की उद्यमियों को घुट्टी पिला दी जाती है। हालात जस के तस। जिले में परसाखेड़ा और रजऊ के अलावा भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र है।
1962 में बने भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र की तस्वीर अन्य दोनों औद्योगिक क्षेत्रों से कुछ अलग है। यहां सड़कें तो काफी जद्दोजहद के बाद ठीक करा दी गईं। लेकिन, जल निकासी और बिजली की समस्या दशकों बाद भी दूर नहीं हो सकी। सोलर या स्ट्रीट लाइटें न होने से शाम होते ही औद्योगिक क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। चोरी की कई घटनाएं हो चुकी हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के चलते उद्यमियों काे डर बना रहता है।
सड़कों पर आ जाता है नाले-नालियों का पानी
भोजीपुरा में किसान जैम की पहली फैक्टरी लगी थी। यहां फूड प्रोसेसिंग, कृषि आधारित समेत 40 छोटी-बड़ी इकाइया हैं जिनसे सरकार को हर माह करीब तीन करोड़ रुपये का राजस्व मिल रहा है। उद्यमियों का दर्द है हजारों लोगों को रोजगार देने के बावजूद जलनिकासी, स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। यहां नाले-नालियां पानी से ज्यादा गंदगी से भरे हैं जिसके चलते जलभराव रहता है। बरसात में हालात काफी खराब हो जाते हैं। गंदगी युक्त जलभराव के चलते पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है। उद्यमियों की कई साल की कोशिशों के बाद नाला निर्माण के लिए बजट मिला। उसमें भी सिर्फ खानापूरी की गई। नतीजतन यहां जलनिकासी बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। औद्याेगिक क्षेत्र में सड़कों में भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया।
फीडर औद्योगिक क्षेत्र का, सप्लाई दूसरी जगह
1962 में औद्योगिक क्षेत्र बनने के बाद पहली फैक्टरी वर्ष 1964 में लगी। फिर बोतल, ढक्कन के साथ पैकेजिंग आइटम बनाने की कई फैक्टरी लगती चली गईं। प्रदेश सरकार ने दोहना स्टेशन से इंडस्ट्री फीडर की लाइन दी ताकि ट्रिपिंग रोकी जा सके और 24 घंटे आपूर्ति दी जा सके। लेकिन इस फीडर से दियोरनियां तक अंधाधुंध तरीके से ग्रामीण क्षेत्र जोड़े गए। इससे औद्योगिक क्षेत्र में हर समय बिजली संकट बना रहता है। उद्यमियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उद्योग बंधु की बैठक में कई बार उठा मुद्दा
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हर माह होने वाले उद्योग बंधु की बैठक में भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र की बदहाली का मुद्दा उद्यमियों ने कई बार उठाया। डीएम ने व्यवस्थाएं सुधारने को कई बार निर्देश भी दिए, लेकिन उन आदेशों पर अमल आज तक कायदे से नहीं हो सका। इतना ही नहीं रात में सुरक्षा तक का कोई इंतजाम नहीं है। हर समय उद्यमी भयभीत रहते हैं।
ये हैं मुख्य समस्याएं
-बिजली की सप्लाई।
-जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं होना।
-स्ट्रीट लाइट की सबसे अधिक समस्या।
-सुरक्षा व्यवस्था के नहीं हैं इंतजाम
क्या कहते हैं उद्यमी
उद्यमी परेशान हैं। कई मंचों पर समस्या उठाने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही। बिजली व जलनिकासी की समस्या मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के समक्ष कई बार उठाई। उद्योग विभाग के अफसर बेलगाम हैं। परेशानी जस की तस बनी है- अजय शुक्ला, अध्यक्ष, भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र।
सड़कों व नालियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए लेकिन नालों से पानी के निकासी की समस्या आज तक नहीं हल हो सकी। उद्योग बंधु की बैठक में इन समस्याओं काे कई बार उठा चुके हैं। सुनवाई न होने से उद्योगों पर प्रभाव पड़ रहा है-गुरप्रीत सिंह, उद्यमी।
भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुए दशकों गुजर गए, लेकिन हमारी समस्याओं के निदान पर शासन-प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। जबकि सरकार को यहां के उद्यमी हर माह करोड़ों रुपये का राजस्व देते हैं-मनोज कुमार, उद्यमी।
बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो सकी हैं। नौ साल बाद पीएनसी से नाला बना दिया लेकिन जलनिकासी का कोई प्रबंध नहीं किया। प्रशासन के साथ-साथ उद्योग विभाग के अफसरों काे इस दिशा में सोचना चाहिए-आरएन दीक्षित, उद्यमी।
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