बरेली: अयोध्या आंदोलन में दो बार जेल गए अरविंद बाजपेयी
बरेली, अमृत विचार। राम मंदिर के लिए जुनूनी कारसेवकों में अरविंद बाजपेयी भी शामिल रहे। उन्होंने राम मंदिर के निर्माण हेतु धन संग्रह अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्हें जेल भी भेजा गया था। कोरोना काल में जब लोग घर से निकलने में डरते थे तब अपनी टोली के साथ जरूरतमंदों की सेवा के लिए तत्पर रहने वाले अरविंद बाजपेयी अब दुनिया में नहीं हैं।
उनके भाई मनोज बताते हैं कि बड़े भाई का नाम जिले के क्रांतिकारी स्वयं सेवकों में लिया जाता था। उस समय के सभी प्रचारकों का घर पर आना-जाना रहता था। 1990 में मानव शुक्ला, संतोष गंगवार की पत्नी सौभाग्यवती गंगवार व अन्य के साथ बड़े भाई अयोध्या जाने को निकले। प्रेम नगर पुलिस ने पकड़ लिया और सेंट्रल जेल भेज दिया। 20 दिन बाद जेल से रिहा हुए और फिर आंदोलन में जुट गए। 1992 में कारसेवक के रूप में अयोध्या आंदोलन व धारा 370 के पोस्टर लगाते समय कोतवाली पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया। उनके साथ मानव शुक्ला,अजय अवस्थी भी थे।
मनोज ने बताया कि 1992 के आंदोलन में कारसेवकों को काफी यातनाएं दी गईं। भैया व उनके साथी क्रांतिकारी स्वयंसेवक कहे जाते थे। कारसेवकों का संघर्ष अब फलीभूत हो रहा है। सारा देश रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रफुल्लित है। खुशी है कि आंदोलन में उनके परिवार का भी योगदान रहा है।
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