लखनऊ : पंचतत्व में विलीन हुए पद्मश्री डॉ. नित्यानंद, अंतिम विदाई देने पहुंचे सैकड़ों लोग

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लखनऊ, अमृत विचार। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सा वैज्ञानिक और भारतीय फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के भीष्म पितामह के रूप में प्रख्यात रहे प्रोफेसर नित्यानंद का अंतिम संस्कार सोमवार को बैकुंठ धाम में हुआ।

भारतीय दवा उद्योग की एकमात्र जननी संस्थान, विश्व विख्यात केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान - सीडीआरआई  के संस्थापक निदेशक रहे डॉक्टर नित्यानंद को उनकी बेटी प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सैकड़ो शोकाकुल नागरिकों और डॉक्टरों ने अंतिम विदाई दी। 

डॉ राम मनोहर लोहिया संस्थान के डॉक्टर एपी जैन, डॉ दीपक, डॉक्टर अंशुमन पांडे, डॉक्टर स्मृति अग्रवाल डॉक्टर अर्पिता, डॉ दीपक मालवीय, केजीएमयू के डॉक्टर सुधीर सिंह डॉक्टर संजीव मिश्रा डॉक्टर एमएलबी भट्ट डॉक्टर अनिल गुप्ता ने डॉ. नित्यानंद को नमन कर श्रद्धांजलि दी।

दरअसल, पद्मश्री प्रोफेसर नित्यानंद के लंबी आयु की प्रार्थना कर रहे लोगों को जैसे ही शनिवार सुबह उनके निधन की खबर लगी चारों ओर शोक की लहर दौड़ गई थी। हर एक की जुबां पर डॉ. नित्यानंद की सरलता और उनके मेडिसिन के क्षेत्र में किये गये खोज, अनुसंधान के कार्यों की ही बात थी। 

डॉक्टर नित्यानंद का पार्थिव शरीर उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। जहां उन्हें श्रद्धांजिल देने के लिए प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत राजनीति और चिकित्सा क्षेत्र के बड़े- बड़े लोग पहुंचे थे।

वैज्ञानिक समुदाय में अब तक की ईजा़द इकलौती नॉन हार्मोनल, नों स्टेरॉयडल कांट्रेसेप्टिव पिल (गैर हार्मोनल, गैर स्टेरॉइडल गर्भनिरोधक गोली), सहेली, जिसे एक समय में नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत करने तक के लिए विचार किया जा रहा था, के जनक भी प्रोफेसर नित्यानंद ही थे। वर्तमान में यह औषधि छाया के नाम से राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम (National family planning program) में भी शमिल रहे है।

औषध अनुसंधान संस्थान (सी. डी. आर. आई), लखनऊ के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. नित्यानन्द औषध खोज एवं विकास अनुसंधान के क्षेत्र में एक जानी-मानी हस्ती थे। उन्होंने सी. डी. आर. आई. को औषध अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व स्तर का केन्द्र बनाने में नेतृत्व प्रदान किया है। औषध निर्माण विज्ञानों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने तथा आम आदमी को कम मूल्यों पर औषधियां उपलब्ध कराने में समर्थ होने के लिए भारती औषध उद्योग को आत्म निर्भर बनाने के अपने प्रयास के लिए व्यापक स्तर पर जाने जाते हैं।

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