Magh Mela: तंबुओ के शहर में 14 थाने, 41 चौकियां, फिर भी नहीं दर्ज होती एफआईआर, जानें वजह
संगमनगरी में बसाया जाता है पूरा एक अस्थाई जिला
मिथलेश त्रिपाठी/प्रयागराज, अमृत विचार। ऐसा कोई भी जिला या शहर नहीं होगा जहां अपराध न होता हो और अपराध के बाद उस मामले में रिपोर्ट न लिखी जाती हो। लेकिन प्रयागराज में एक ऐसा भी शहर है जहां लाखों लोगों के जुटने के बाद भी अपराध के मामले पुलिस को मुकदमा दर्ज नहीं करती है। यह सुनकर आपको अचरज लग रहा होगा।
जी हां वह संगम नगरी में बसाये जाने वाले तंबुओं के शहर का है। जहां पुलिस किसी भी अपराध में एफआईआर दर्ज नहीं करती है। माघ मेला में दर्जन भर अस्थायी थाने और चौकियां बनाई गयी हैं। अपराध के मामले में बिना लिखापढ़ी के ही निस्तारण कर दिया जाता हैं।
प्रयागराज में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर डेढ माह के लिए तंबुओं का पूरा शहर बसाया जाता है। जहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु श्रृद्धा और आस्था के साथ कल्पवास करने आते हैं। यहां मेले में प्रशासनिक व्यवस्था बिल्कुल एक जिले की तरह बनाई जाती है।
तंबुओं के शहर पूरी तरह से बस चुका है। लाखों लोग यहां पर पिछले कुछ दिनों से रहकर कल्पवास कर रहे है। माघ मेला में हर वर्ष पुलिस लाइंस, अस्थाई थाने, चौकियां, फायर ब्रिगेड सहित जल पुलिस की व्यवस्था की जाती है। इन सारी व्यवस्थाओं के बिच कोई अपराध नहीं होता है। अगर होता भी है तो उस मामले को पुलिस वही निस्तारण करा देती है। किसी भी मामले में एफआइआर नहीं दर्ज की होती है।
दारागंज और झूंसी में दर्ज होती है रिपोर्ट
माघ मेले में भले ही भारी पुलिस फोर्स और थाने चौकी बने हो, मगर वह सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था ले लिए ही तैनात होते है। मेले में छोटे-छोटे मामलो को यहां से निस्तारण कर दिया जाता हैं। अगर मेले में कोई बड़ा मामला आया तो जरूरत पडऩे पर दारागंज और झूंसी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है। माघ मेला में किसी प्रकार का कोई अपराध नहीं होता है।
माघ मेला में बने है 14 अस्थायी थाने
प्रयागराज माघ मेला में हर वर्ष मेला एसएसपी की नियुक्ति अलग से की जाती है। इसके साथ अस्थायी रूप से 14 थाने बनाए जाते हैं। जैसे शहर में थानो और चौकियों के नाम होते है। उसी प्रकार से इन थानों का नाम भी रखा जाता है। जिसमें परेड थाना कल्पवासी थाना, कोतवाली, महावीर थाना, जल पुलिस, अक्षयवट थाना, संगम थाना, महिला थाना, अरैल थाना, प्राचीन गंगा, खाक चौक, झूंसी और प्रयागवाल थाना शामिल हैं। इसके अलावा 40 पुलिस चौकियां बनाईं जाती हैं। पहले 36 चौकियां और 13 थाने होते थे। इस बार बढ़ाये गये है। इन सभी थाने और पुलिस चौकियों में प्रभारी निरीक्षक की नियुक्ति भी होती है।
आस्था और धर्म की नगरी में कोई गिरफ्तारी नहीं
आस्था और धर्म की नगरी में कोई गिरफ्तारी नहीं होती है। पुलिस अगर किसी आपराध के मामले में किसी को माघ मेला क्षेत्र पकड़ती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई माघ मेला पुलिस नहीं करती है। उसकी गिरफ्तारी दारागंज, झूंसी में दिखाई जाती है। उसकी रिपोर्ट भी उसी थाने में दर्ज होती है। माघ मेले में धर्म की नगरी से कोई भी पुलिस पाप का भागी नहीं बनना चाहता है।
माघ मेला में अस्थाई तौर श्रृद्धालुओं को डेढ़ माह के लिए बसाया जाता है। यहां पर उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस थाने बनाये जाते हैं। यहां रिपोर्ट दर्ज इसलिए नहीं होती, क्योंकि किसी भी मामले में इसकी विवेचना करनी होती है। मेला समाप्त होने के बाद यह थाने से समाप्त कर दिये जाते हैं। मेला क्षेत्र से लगे हुए स्थाई थाने में रिपोर्ट दर्ज होती है, जिससे बाद में विवेचना हो सके और भुक्तभोगी को परेशान न होना पड़े.., डा. राजीव रंजन मिश्र, डी.आई.जी/एसएसपी माघ मेला, प्रयागराज।
यह भी पढ़ें:-लखनऊ: किराये पर लिया लक्जरी गाड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार कर हड़पा, पीड़िता ने पुलिस पर लगाया कार्रवाई ना करने का आरोप
