नमो एप: घर-घर मोदी से आगे बढ़ी मुहिम हर दिमाग में घर बनाने तक पहुंची
शिवांग पांडेय, बरेली, अमृत विचार। पहली बार 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद घर-घर मोदी का नारा गूंजा था लेकिन भाजपा की चुनावी राजनीति पिछले दस सालों में इसके आगे मीलों का सफर तय कर चुकी है।
भाजपा की ओर से एक सर्वे की शक्ल में नई मुहिम हर दिमाग में घर बनाने की शुरू हुई है। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नमो एप के जरिए लोगों पर मनोवैज्ञानिक असर छोड़ने वाली इस मुहिम के दायरे में सिर्फ मौजूदा वोटर नहीं बल्कि अगली पीढ़ी के वोटरों का दिमाग पढ़ने का भी इरादा साफ झलक रहा है। शहर के मनोवैज्ञानिक ऐसा ही मानते हैं।
जिले में नमो एप के जरिए अधिकतम लोगों तक पहुंचने की कोशिश की गई है। अनुमानित तौर पर अब तक यह एप करीब ढाई लाख मोबाइल फोन में डाउनलोड कराया गया है। स्कूलों में प्रबंधन की ओर से शिक्षकों को अनिवार्य तौर से अपने मोबाइल फोन में एप डाउनलोड करने के निर्देश जारी किए गए थे। ऐसा ही कई निजी कंपनियों में हुआ है। स्कूलों में पढ़ने वाले ऐसे विद्यार्थियों से भी नमो एप डाउनलोड कराया गया है जो अभी वोटर तक नहीं हैं। भाजपा के नेताओं की ओर से भी अलग-अलग वर्गों में नमो एप डाउनलोड कराए जा रहे हैं।
नमो एप पर सर्वे की शुरुआत इस टैग लाइन के साथ होती है, जनमन सर्वे: नए भारत की प्रगति के लिए एक कदम। कहने को इस सर्वे में सरकार के कामों पर लोगों से फीडबैक मांगा जा रहा है। इसके लिए दर्जन भर से ज्यादा सवाल पूछे गए हैं। मोटे तौर पर लगता है कि भाजपा सरकार जानना चाहती है कि उसकी कोशिशों का जमीनी स्तर तक क्या असर हुआ, लेकिन इस सर्वे के नतीजे चुनाव में उतरने से पहले खुद भाजपा हाईकमान के लिए कई सवालों के जवाब स्पष्ट करने वाले हैं।
इस पर मनोचिकित्सकों की ओर से बताया गया कि किसी व्यक्ति की ओर से फीडबैक लेने का मतलब उनके अपने कामों के आंकलन को कहा जाता है। मनोवैज्ञानिक विषय पर पीएचडी कर रहे शैलेश कुमार शर्मा ने बताया कि
सरकार का उद्देश्य चुनाव से पहले जनता की राय जानना हो सकता है। कई और राज्यों में भी चुनाव से पहले नमो एप के जरिए सर्वे किया गया है। सर्वे में जो सवाल पूछे गए हैं, उनके जवाब आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों का रिपोर्ट कार्ड बन सकते हैं। जनता का रुझान भी साफ हो सकता है। - शैलेश कुमार शर्मा, मनोविज्ञान के शोधार्थी
सर्वेक्षण किसी भी मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और कई विशिष्ट और तथ्यात्मक जानकारी इकट्ठी करने में मददगार होते हैं। ऐसे सर्वेक्षण का हिस्सा बनने वाले लोगों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है और उसके अनुरूप योजना तैयार की जा सकती है। - डॉ. सुविधा शर्मा, बरेली कॉलेज की मनोवैज्ञानिक विभाग की विभागाध्यक्ष
नमो एप: इन सवालों के देने हैं जवाब
1- मोदी सरकार की ओवरऑल परफार्मेंस पर क्या रेटिंग देंगे।
2- क्या आप अतीत की तुलना में अपने भविष्य के बारे में ज्यादा आशान्वित महसूस करते हैं।
3- विश्व में भारत के बढ़ते कद पर आपकी क्या राय है।
4- इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान समृद्धि, भ्रष्टाचारमुक्त सरकार, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत, कानून-व्यवस्था और शहरी विकास पर आपकी राय।
5- क्या आपने व्यक्तिगत रूप से किसी सरकारी योजना का लाभ लिया है।
6- क्या आपका सांसद निर्वाचन क्षेत्र में पहुंच योग्य और दृश्यमान है।
7- क्या आप सांसद की पहल से जागरूक हैं।
8- क्या आप सांसद के कामों से संतुष्ट है।
9- क्या आपके सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोकप्रिय है।
10- अपने निर्वाचन क्षेत्र के तीन लोकप्रिय नेताओं के नाम लिखिए।
11- आपकी संतुष्टि: रोड,बिजली, पीने योग्य पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन संबंधित मुद्दे, रोजगार, कानून व्यवस्था, स्वच्छता।
12- आपके द्वारा वोट डालते समय मुख्य कारक: इन्फ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक मुद्दे, लोककल्याण योजनाएं, रोजगार, नागरिक मुद्दे, पीएम उम्मीदवार, राजनीतिक दल, राष्ट्रीयता।
13- क्या आप 2024 लोकसभा के चुनाव में बीजेपी को वोट डालेंगे।
आपके जवाब, कई बंद दरवाजों की चाबी
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक शुरुआती दो सवालों के जवाब यह बताएंगे कि मोदी सरकार के समर्थक हैं या नहीं। हैं तो आपका समर्थन कितना मजबूत है। इसके बाद के कुछ सवाल यह पता लगाने में मदद करेंगे कि भाजपा और गैरभाजपाई दलों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों का आप पर क्या असर है।
सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का क्या रुझान है और जनता के बीच चुनाव में क्या मुद्दे भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अपने मौजूदा सांसद को आप वोट देने लायक मानते हैं या नहीं। उसके बजाय भाजपा का कोई और नेता तो आपको पसंद नहीं है।
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