बाराबंकी: सदर तहसील में गोलमाल, अभिलेख तक नहीं दिखा पाए कर्मचारी, चेयरमैन ने दो घंटे तक खंगाली तहसील

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अधिकारियों, कर्मचारियों को दी झूठ न बोलने की चेतावनी, दुरुस्त नहीं मिले राजस्व अभिलेखों के रजिस्टर

बाराबंकी, अमृत विचार। राजस्व परिषद के चेयरमैन हेमंत राव ने जब एक-एक कर सदर तहसील के विभिन्न पटलों का निरीक्षण किया तो उन्हे यहां काफी घोलमाल मिला। पटल देख रहे संबंधित कर्मचारी जरुरी अभिलेख तक नहीं दिखा पाए। यहां तक किसान दुर्घटना बीमा के भुगतान से संबंधित मौके पर कोई रजिस्टर नहीं मिला। करीब दो घंटे तक चले निरीक्षण में अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक हलकान रहे। 

पूर्व से निर्धारित समयानुसार सुबह करीब 11 बजे सदर तहसील पहुंचे राजस्व परिषद के चेयरमैन हेमंत राव को सबसे पहले पुलिस कर्मियों ने गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी दी। इसके बाद वह सीधे कम्प्यूटर रुप में पहुंचे और कम्प्यूटर पर बैठ कर ऑनलाइन आने वाले विभिन्न राजस्व संबंधी कार्यों के आवेदनों की स्थिति देखी और उनके निस्तारण के बारे में सत्यता परखी। 

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इस दौरान पास में खड़े जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कई मौके पर उनके सवालों का जवाब देकर संतुष्ट किया। इसके बाद श्री राव देवी आपदा पटल पहुंच कर पटल सहायक भानू प्रताप सिंह से अब तक हुईं कार्रवाई की स्थिति पूछी और अभिलेख देखे। इस दौरान लाभार्थियों को दिए गए धनराशि संबंधित अभिलेख व पोर्टल को भी जांचा। 

इसके बाद कृषि दुर्घटना बीमा योजना के पटल सहायक से जब दिसंबर माह तक हुए भुगतान संबंधी रजिस्टर मांगा तो कर्मचारी एक-दूसरे का बगल झांकते रहे। हालांकि बताया गया कि भुगतान सीधे ट्रेजरी के माध्यम से जाता है। भेजे गए भुगतान का ब्योरा पटल पर नहीं मिलता है। इस पर डीएम ने अश्वस्थ किया की अब सभी तहसीलों पर इसका ब्योरा रखा जाएगा। 

वहीं आने वाले ऑनलाइन आवेदनों की लेखपाल व कानूनगो द्वारा जांच संबंधी पत्रवली भी प्रस्तुत नहीं कर सके। अलमारी में ढूंढने के बाद रजिस्टर नहीं मिला। इस दौरान सतरिख निवासी लाभार्थी जगजीवन ासे फोन पर बात कर यह जाना कि उसे धनराशि मिली की नहीं। इस पर उसने कहा कि वह दो माह से बैंक नहीं गया है पर उसके मोबाइल पर कोई मैसेज भी नहीं आया है। जबकि पोर्टल पर अक्तूबर माह में दुर्घटना बीमा का लाभ देने को बताया गया। 

चेयरमैन श्री राव इसके बाद राजस्व अभिलेखागार पहुंचे। यहां उन्होंने सर्किलवार रखे अभिलेखों को देखा। नजारत कक्ष में पहुंचने पर यहां तैनात कर्मचारी अपने पटल पर नहीं मिला वहीं अभिलेख भी नहीं मिले। इस पर चेयरमैन ने नाराज होकर कहा कि जब निरीक्षण चल हो रहा तो कर्मचारी कहां गया। इस पर बताया गया कि वह फाइल लेकर कोर्ट गया है। निरीक्षण के दौरान चेयरमैन ने नायब तहसीलदार के कक्ष में बैठकर कई राजस्व संबंधी पत्रावलियां भी देखी।

बगैर पैसा लिए काम नहीं करते लेखपाल
चेयरमैन के समक्ष अधिवक्ताओं ने कहा लेखपाल बगैर पैसा लिए कोई काम नहीं करते हैं। एक-एक लेखपाल कई सालों से जमा है। इस पर डीएम ने कहा कि ऐसे लेखपालों को चिन्हित किया गया है। जल्द ही फेरबदल होगा। 

अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि कई वाद लंबे समय से चल रहे हैं। निस्तारण नहीं हो रहा है। एक अधिवक्ता ने बताया कि 1970 से चल रहा एक वाद आज तक निस्तारित नहीं हो सका है। वहीं पाका 11 की कार्रवाई पर भी सवाल  उठाए। साथ ही लेखपालों द्वारा हर काम में पैसा मांगने की बात कही। इस मौके पर आरपी गौतम, बलराम, सुनीत अवस्थी, रामकुमार शुक्ल समेत सैकड़ों वकील मौजूद रहे।

डिजिटलाइजेशन हो रहे राजस्व कार्य
चेयरमैन हेमंव राव ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राजस्व संबंधी कार्य अब डिजिटल हो रहे हैं। रियल टाइम  खतौनी, अमल दरामद, घरौनी आदि सभी तरह के काम इसमें शामिल हैं। 

घरौनी के प्रमाण पत्र दे रहे हैं। इससे गांव में भूमि विवाद के वाद कम होंगे साथ ही शांति व्यवस्था भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि वाद का जो भी निस्तारण व आदेश होगा उसे पोर्टल पर फीड करना होग। ताकि जो वादकारी है उसे तत्काल पता चल जाए कि लिखित आदेश क्या है। जो भी आदेश व निस्तारण पोर्टल पर आए तभी इसे माना जाएगा।

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