Exclusive: जाम के झाम का समाधान, सुगम यातायात को वरदान; सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी करेंगे आउटर रिंग रोड का शिलान्यास...

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, मनोज त्रिपाठी। कानपुर के विकास में मील का पत्थर मानी जा रही 93.20 किलोमीटर आउटर रिंग रोड का 15 फरवरी को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शिलान्यास करेंगे। तीन साल में पूरी होने वाली इस परियोजना से दूसरे शहर जाने वाले वाहन कानपुर में प्रवेश किए बिना गंतव्य को निकल जाएंगे। इससे बाहरी वाहनों के दबाव से राहत मिलेगी। 

लेकिन शहर के भीतर लगातार विकराल होते जा रहे जाम के झाम पर लगाम लगाने के लिए बनी योजनाएं कब परवान चढ़ेंगी, यह सवाल अभी अनुत्तरित है। शहर की सड़कों पर जाम और भीड़भाड़ कम करने के लिए इनर रिंग रोड और गंगा लिंक इनर सर्किल रोड परियोजना बनाई गई थी। इन दोनों परियोजनाओं के जरिए नगरीय परिवहन को सुगम यातायात उपलब्ध होना है। 

शहर को एलिवेटेड रोड के जरिए भीतर से घेरकर विभिन्न क्षेत्रों को आपस में जोड़ा जाना है। माना गया था कि दिल्ली में रिंग रोड की तरह बनने वाली सर्कुलर रोड से यातायात के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने में मदद करेगी। अभी शहर के भीतर पांच से दस किलोमीटर का जो सफर तय करने में एक से लेकर दो घंटे लग जाते हैं, उसे यह रोड बनने पर दस से बीस मिनट में पूरा किया जा सकेगा। लेकिन अफसोस, दोनों योजनाओं की फाइल बीते दो-तीन वर्षों से धूल खा रही है और विकास के जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियों के साथ जनप्रतिनिधियों तक ने चुप्पी साध रखी है। 

मुंबई के वर्ली सी लिंक जैसा गंगा लिंक इनर सर्किल रोड 

गंगा लिंक इनर सर्किल रोड का खाका वर्ष 2018 में उच्चस्तरीय समग्र विकास समिति में खींच गया था। इसकी परिकल्पना मुंबई के वर्ली सी लिंक से ली गई थी। करीब पांच वर्ष पूर्व तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव कुमार ने यूपीएसआईडीसी को नोडल एजेंसी नियुक्त कर योजना का डीपीआर जल्द तैयार करने के लिए कहा था। इस परियोजना से शहर का जाम खत्म होने के साथ ही उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के लोगों का  आवागमन आसान होने और शुक्लागंज से शहर आने वालों को भी राहत मिलनी थी।
                
गंगा लिंक इनर सर्किल रोड का रूट 

गंगा लिंक इनर सर्किल रोड कल्याणपुर स्थित इंद्रानगर के समीप जीटी रोड से शुरू होकर सिंहपुर, मकड़ीखेड़ा, मैनावती मार्ग होते हुए गंगा बैराज मार्ग के समानांतर पुल को पार करते हुए शुक्लागंज से पहले लोअर गंगा कैनाल नहर के गंगा में मिलने वाले स्थान से आगे रामगंगा कमांड सिंचाई विभाग कार्यालय, जुहारी देवी कालेज, मालरोड, एक्सप्रेस रोड, घंटाघर रोड, डिप्टी का पड़ाव, जरीब चौकी से कालपी रोड, फजलगंज, विजय नगर, नमक फैक्ट्री चौराहा, केडीएमए होकर दलहन अनुसंधान संस्थान होते हुए आरंभ वाले स्थान पर ही खत्म होना है। एलिवेटेड गंगा लिंक इनर रिंग रोड को गंगा बैराज, वीआईपी रोड, माल रोड, घंटाघर, जरीब चौकी, फजलगंज, विजय नगर और आवास विकास में कनेक्टिविटी दी जानी है। 

         
-     गंगा लिंक इनर सर्किल रोड का प्रस्ताव वर्ष 2018 में बना था। तत्कालीन मुख्य सचिव ने कानपुर के विकास के लिए इस परियोजना को बेहतर बताते हुए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए थे। 

-    आईआईटी के विशेषज्ञों ने इस परियोजना को उपयुक्त बताते हुए कहा था कि कानपुर को जाम से निजात दिलाने के लिए ऐसे ही प्रोजेक्ट की जरूरत है। 

-     केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के कंसलटेंट ने इसकी डिजाइन भी तैयार की थी। परियोजना का डीपीआर बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय से भी हरी झंडी मिल गई थी।

-    शहर के विभिन्न हिस्सों से होता हुआ करीब 31 किमी लंबा यह मार्ग उत्तर और दक्षिण क्षेत्र की राह आसान करेगा। 

-    परियोजना के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी में आइजी जोन, जिलाधिकारी, केडीए उपाध्यक्ष, एमडी केस्को, नगर आयुक्त, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता, आईआईटी और समग्र विकास समिति के समन्वयक को शामिल किया गया था। यूपीसीडा के सीईओ सचिव नामित हुए थे।

-    इसके निर्माण में किसी प्रकार का मार्ग अवरोध लगभग नहीं के बराबर है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

इनर रिंग रोड परियोजना 

गंगा लिंक इनर रिंग रोड से इतर शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2020 में इनर रिंग रोड बनाने का फैसला लिया गया था। सांसद सत्यदेव पचौरी ने इसके निर्माण को लेकर राजमार्ग और परिवहन मंत्रालय में पहल भी की थी। लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इनर रिंग रोड के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की। 

इसे एलिवेटेड स्वरूप प्रदान किया गया। एनएचएआई ने इनर रिंग रोड 49.75 किलोमीटर लंबी बनाना प्रस्तावित किया, ताकि शहर के होने वाले भावी विस्तार को भी गति प्रदान की जा सके। हालांकि इसमें मुख्य निर्माण कार्य करीब 28 किलोमीटर हिस्से पर ही किया जाना है।  

जाजमऊ से शुरू होकर पनकी तक होना है निर्माण

इनर रिंग रोड जाजमऊ से शुरू होकर सर्किट हाउस रोड से होते हुए मालरोड के समीप  झाड़ीबाबा पड़ाव होकर वीआईपी रोड के ऊपर से गुजरते हुए विष्णुपुरी, आजादनगर और केसा कालोनी मकड़ीखेड़ा से कल्याणपुर-पनकी मार्ग होते हुए पनकी में हाईवे से जोड़ा जाना है। यह मार्ग 27.25 किलोमीटर लंबा होगा। 

यह तय हुआ है कि पनकी में हाईवे से जुड़ने के बाद एनएचएआई का भौंती से जाजमऊ तक का 22.50 किलोमीटर लंबा हाईवे इनर रिंग रोड का ही हिस्सा होगा। इनर रिंग रोड योजना के निर्माण पर प्रारंभिक खर्च का अनुमान 12 अरब रुपये लगाया गया था।

यातायात जाम और वाहनों के दबाव से मिलनी है निजात

रामादेवी और जाजमऊ में लोगों को रोज यातायात जाम से जूझना पड़ता है। इसी तरह माल रोड पर भी वाहनों का भारी दबाव रहता है। वीआइपी रोड पर सरसैया घाट चौराहे से डीजी कालेज तक व्यस्त समय में रोज जाम लगा रहता है। स्कूल छूटने और शुरू होने के समय तो इस रोड से निकलना मुश्किल हो जाता है। जीटी रोड पर स्थित कल्याणपुर-पनकी रोड की रेलवे क्रासिंग पर भी अक्सर लोग घंटों जाम में फंसते हैं। शहर के भीतर जाम की इसी समस्या के समाधान के लिए इनर रिंग रोड के निर्माण की योजना बनाई गई थी।

यहां सिर्फ सड़क चौड़ीकरण से बन जाएगी बात 

इनर रिंग रोड से पनकी पहुंचकर जो वाहन सवार भौंती-जाजमऊ फ्लाईओवर हाईवे पर नहीं जाना चाहें, उनकी सुविधा के लिए योजना में जाजमऊ से रामादेवी होते हुए पनकी तक राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन का चौड़ीकरण किया जाना प्रस्तावित है। इसी तरह पनकी से कल्याणपुर जाने वाली सड़क को भी चौड़ा किया जाएगा। 

कल्याणपुर से इंदिरा नगर, केसा कालोनी तिराहा, प्राणि उद्यान, आजाद नगर, कंपनी बाग का वर्तमान रास्ता रिंग रोड का हिस्सा रहेगा। इसके बाद रिंग रोड एलिवेटेड होकर वीआइपी रोड से मेघदूत तिराहा फिर झाड़ीबाबा पड़ाव, सर्किट हाउस रोड से जाजमऊ गेट तक पहुंचेगी। जाजमऊ में लखनऊ हाईवे तक सड़क को विकसित किया जाएगा।

यहां बनाई जानी है एलिवेटेड रोड 

49.75 किलोमीटर लंबी इनर रिंग रोड का करीब 13.50 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड बनाया जाना है। कंपनी बाग (सीएसए) से मेघदूत तिराहा यानी वीआईपी रोड पर इनर रिंग रोड एलिवेटेड होगी। कल्याणपुर में भी रोड का करीब ढाई किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड बनाया जाना है। इनर रिंग रोड परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, केडीए, नगर निगम, आवास विकास जैसे विभाग शामिल किए गए थे। 

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