Kanpur News: श्रम विभाग के पोर्टल से एक करोड़ की थी ठगी, महिला समेत छह आरोपी गिरफ्तार, इस तरह किया पूरा फर्जीवाड़ा

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कानपुर में ठगी करने वो छह आरोपी गिरफ्तार

कानपुर, अमृत विचार। श्रम विभाग के पोर्टल से एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने की घटना का आखिरकार पुलिस ने खुलासा कर दिया है। क्राइम ब्रांच की टीम ने प्रेमी जोड़े के साथ चार अन्य लोगों को छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश के अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से कुछ माल की बरामदगी भी हुई है। 

बुधवार को पुलिस ऑफिस में आयोजित प्रेसवार्ता में घटना का खुलासा करते हुए डीसीपी क्राइम आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि एक फरवरी 2024 को अपर श्रमायुक्त कानपुर मंडल कल्पना श्रीवास्तव ने पुलिस को तहरीर दी थी कि साइबर अपराधियों ने कन्या विवाह सहायता योजना के अंतर्गत अनुदान के फर्जी आवेदन कर उनकी आईडी व अधिकारियों के फर्जी डिजिटल सिग्नेचर का प्रयोग कर डीएलसी तथा एलसी की आईडी को स्कीप करते हुए लगभग कुल 196 अपात्र श्रमिकों के खाते में लगभग एक करोड़ सात लाख की धनराशि का ट्रांसफर कर लिया है। जिसके बाद साइबर थाना में मुकदमा पंजीकृत कर घटना के खुलासा के लिए पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के आदेश पर सर्विलांस तथा स्वाट टीम समेत चार टीमों का गठन किया गया। इसके बाद उनकी टीम ने जांच शुरू की तो पता चला कि इस घटना के मुख्य मास्टरमाइंड प्रेमी जोड़ा उदित मिश्रा निवासी सजेती हाल पता हाल पता 19 वीं मंजिल बिल्डिंग पारा थाना लखनऊ और उसकी प्रेमिका नैंसी ठाकुर निवासी वीर सावरकर नगर फेस-02 एमआई डी सी ऐरिया बुटी बोरी नागपुर महाराष्ट्र हैं। डीसीपी ने बताया कि उनकी दोस्ती हैकेथॉन प्लेटफार्म से हुई थी। उदित श्रम विभाग के टेक्निकल सलाहकार के रूप में मदद करता था और ट्रेजरी ऑफिसर का डिजिटल सिग्नेचर कर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। बताया पुलिस ने इस धोखाधड़ी में शामिल सजेती हाल पता लखनऊ थाना पारा निवासी अंकित मिश्ना, मुरादाबाद के थाना मोजपुर के ग्राम वासिदपुर टिगरी निवासी मोहम्मद यासीन, मुरादाबाद के थाना कटघर अंबेडकर नगर निवासी ललित कश्यप, सीतापुर के आदर्श नगर सेक्टर निवासी विनय दीक्षित को गिरफ्तार किया गया है। डीसीपी ने बताया कि उदित और अंकित दोनों भाई हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टीम को 01 लाख रुपये की धनराशि से पुरस्कृत करने की घोषणा की गई। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

लखनऊ में श्रम विभाग में कार्यरत अकांउटेंट ने की मदद

धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड उदित मिश्रा ने पुलिस के सामने बताया कि वो वेबसाइट टेस्टिंग का काम करता है। श्रम विभाग की वेबसाइट में उसने बचाव का रास्ता खोज लिया। उदित ने बताया कि लखनऊ स्थित श्रम विभाग में कार्यरत अकाउंटेंट दिनेश दीक्षित ने पूरी जानकारी दी। उदित ने बताया कि अकाउंटेंट ने ही उसे डिजिटल सिग्नेचर की डीएफसी दी थी। इसकी मदद से ही उसने पूरी घटना को अंजाम दिया। उदित ने आरोप लगाते हुए बताया कि दिनेश ने ही एक्सल फाइल में 18 खातों की जानकारी दी थी। इसमें 19.80 लाख रुपये की रकम उनके पास गई। उदित ने बताया कि श्रम विभाग की योजनाओं का दो बार पूरे देश में टॉप पर लेकर आया इसके लिए उसे भारत सरकार ने भी दो बार सम्मानित भी किया। लखनऊ में आयुष्मान योजना में टारगेट पूरा करने के लिए बुलाया गया था। 

सगे भाई कर रहे थे वारदात पूरी राशि का 20 प्रतिशत मिलना था

मास्टरमाइंड उदित ने खुलासा में टीम को बताया कि उसे धोखाधड़ी करने के लिए कुल धनराशि में 20 प्रतिशत रकम मिलनी थी। कुछ रकम उसके भाई अंकित मिश्रा के खाते में गई। उसने बताया कि कृष्णा नगर स्थित एक ज्वैलर्स के पास नकद का आदान-प्रदान किया गया था। इसका सीसीटीवी भी पुलिस को मिल गया। 

अपात्र श्रमिकों के खाते में गई रकम

डीसीपी ने बताया कि विभागीय प्रक्रियाओं को बाईपास कर डीएलसी व एलसी की आईडी को स्कीप करते हुए कुल 196 अपात्र श्रमिकों के खाते में लगभग एक करोड़ सात लाख की धनराशि को रातों-रात ट्रांसफर कर दिया गया। साइबर अपराधियों ने सहारनपुर में तैनात रोहित कुमार की आईडी से बिना मोबाइल नंबर, बिना नवीनीकरण, बिना किसी आईडी के 25 और 30 जनवरी को 259 आवेदन कराए। रोहित की आईडी से आवेदन आवंटित नहीं हो सकते थे। शातिरों ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी कानपुर देहात अरविंद की आईडी से आवंटन की प्रक्रिया पूरी की।

प्रेमिका बीटेक और प्रेमी साइबर सिक्योरिटी में किए ऑनलाइन कोर्स

डीसीपी ने बताया कि अभियुक्तों ने प्रयोग किए गए विभिन्न खातों में अपराध से आई हुई लगभग 64 लाख रुपये की रकम को भी फ्रीज कराया गया। बताया कि पूछताछ में पता चला है कि मास्टरमाइंड उदित मिश्रा बेहद शातिर किस्म का है। उसकी प्रेमिका नैंसी ठाकुर कंप्यूटर साइंस में बीटेक है। तथा उदित यूट्यूब तथा अन्य माध्यम से साइबर सिक्योरिटी के कई ऑनलाइन कोर्स किए हैं। 

आरोपियों के पास से माल बरामदगी

एडीसीपी अपराध मनीष सोनकर ने बताया कि 63 लाख रुपये की धनराशि को फ्रीज कराया गया। 05 मोबाइल, एक कीपैड मोबाइल, पांच लैपटॉप, एक सोने की चेन, दो लाख उनतालीस हजार, चार सामानों की क्रय रसीदें, एक पासबुक और चेकबुक बरामद हुई है।

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