UP: मेला राम नगरिया में आयोजित हुआ सम्मेलन; फर्रुखाबाद का नाम भीष्म पितामह नगर करने का रखा गया प्रस्ताव
सम्मेलन में मुख्य अतिथि पूर्व आईजी शैलेन्द्र प्रताप सिंह रहे मौजूद
फर्रुखाबाद, अमृत विचार। पांचाल प्रभा हरण ने ब्रह्म सत्संग का मंत्र इसी पांचाल से निकाला था। आज इसकी ब्रांडिंग किए जाने की आवश्यकता है। यह बात मेला राम नगरिया में आयोजित पांचाल शोध एवं विकास समिति के सम्मेलन में पूर्व पुलिस महानिरीक्षक इतिहासविद शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कही।
पूर्व आईजी ने कहा कि जितना वैभवशाली इतिहास फर्रुखाबाद का है, उतना किसी अन्य जनपद का नहीं सुना। इतिहास शोध और सीखने का विषय है। सीखकर आगे बढ़ने का माध्यम है। दुनिया के साथ चलने के लिए अपनी सोच को वैज्ञानिक करना पड़ेगा। कैंची धाम के बाबा नीब करौरी का मुख्य स्थान फर्रुखाबाद है।
सबसे मृदु भाषा से बोलना ही पर्यटन का आधार है। उन्होंने मुगल आक्रांताओं का इतिहास भी दोहराया। संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए संयुक्त सचिव भूपेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्राचीन गौरव को स्थापित करने के लिए संस्था निरंतर कार्यरत है। सम्मेलन में संस्था प्रमुख सुरेंद्र सिंह सोमवंशी ने कहा कि फर्रुखाबाद सभी धर्म के अनुयायियों की आस्था का केंद्र हैं।
उन्होंने कपिल मुनि महाभारत और रामायण काल के अनेक स्थानों की विस्तृत जानकारी दी। श्वेता दुबे ने सामाजिक कार्यों में महिलाओं की सहभागिता पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि होटल प्रबंधन पर्यटन संस्थान बीआर विश्वविद्यालय, आगरा के निदेशक डॉ. लव कुश मिश्रा ने कहा कि हमें अपने इतिहास पर गर्व करते हुए सरकार के सामने तथ्यपूर्ण ढंग से मांगे रखनी हैं। जनपद का नाम बदलने से हम अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़ सकेंगे।
आज हमें कोई भी कार्य अर्थव्यवस्था से जोड़कर करना होगा, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण अयोध्या है। वहां छोटे-छोटे लोग अच्छी कमाई कर रहे हैं। भारत आज धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन रहा है। इसे और अधिक बढ़ाना है। उन्होंने फर्रुखाबाद का नाम भीष्म पितामह नगर करने का प्रस्ताव रखा। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे चंद्रभूषण सिंह मुन्नू बाबू ने कहा कि फर्रुखाबाद अगर आज भी विकास से अछूता है।
इसके लिए जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। ब्रह्मदत्त द्विवेदी की कमी आज खल रही है। वीरेंद्र सिंह राठौर ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि जिले का नाम बदलवाने के लिए जिला पंचायत के माध्यम से प्रस्ताव भेजने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में कै. डीएस राठौर, प्रो. मुकेश राठौर, प्रो. जीत बहादुर सिंह, जितेंद्र सिंह राजावत, निहारिका पटेल, पंकज वर्मा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
अब तक तीन पुस्तकें लिख चुके शैलेन्द्र प्रताप सिंह
पूर्व आईजी शैलेन्द्र प्रताप सिंह अब तक तीन पुस्तकें बैस जाति पर लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज हर्ष वर्धन कन्नौज के रहने वाले थे। वह देश-विदेश में घूम-घूम कर शोध कर रहे हैं। कम्पिल नगरी का गौरवशाली इतिहास रहा है। द्रोपदी का जन्म कम्पिल नगरी में ही हुआ था। महावीर स्वामी का पहला प्रवचन कम्पिल में हुआ। जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर स्वामी विमल नाथ का जन्म कम्पिल में ही हुआ था।
