बदायूं: सपा ने बदला प्रत्याशी, भतीजे के बजाय चाचा शिवपाल होंगे उम्मीदवार
बदायूं, अमृत विचार: समाजवादी पार्टी ने बदायूं लोकसभा सीट से प्रत्याशी 21 दिनों में बदल दिया है। सपा ने मंगलवार को तीसरी सूची जारी कर दी है। भतीजे धर्मेंद्र यादव की जगह उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव बदायूं लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाए गए हैं। माना जा रहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा छोड़ने और सपा के राष्ट्रीय महासचिव सलीम इकबाल शेरवानी के पद इस्तीफा देने की वजह से यह निर्णय लिया गया है।
बदायूं लोकसभा सीट पर धर्मेंद्र यादव को मजबूत प्रत्याशी माना जा रहा था। वह पहली बार मैनपुरी सीट का उपचुनाव जीते। 2009 और 2014 में बदायूं लोकसभा सीट पर जीत हासिल की। उन्होंने जिले को राजकीय मेडिकल कॉलेज, ओवरब्रिज की बड़ी सौगात दिलाई लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में डॉ. संघमित्रा मौर्य ने उन्हें 18 हजार वोट से हरा दिया था।
सपा ने 30 जनवरी को प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की थी। जिसमें धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित किया था। धर्मेंद्र यादव ने जनसभाएं करने शुरू की थी लेकिन मंगलवार को सपा की तीसरी सूची में धर्मेंद्र यादव की बजाय शिवपाल सिंह यादव को प्रत्याशी बनाने के निर्णय ने सभी को चौंका दिया है। वहीं धर्मेंद्र यादव को कन्नौज व आजमगढ़ सीट का प्रभारी बनाया गया है।
ए को नजरअंदाज करने की वजह से तो नहीं बदला टिकट
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को साथ लेकर चुनाव लड़ने की बात कही थी। पिछले दिनों सपा ने राज्यसभा के प्रत्याशियों की घोषणा की लेकिन ए यानि अल्पसंख्यक को नहीं रखा। जिसकी वजह से सपा के राष्ट्रीय महासचिव व बदायूं सीट से पांच बार से सांसद रहे सलीम इकबाल शेरवानी ने अपने पद से इस्तीफा दिया था।
पूर्व मंत्री आबिद रजा ने राज्यसभा चुनाव में ए यानि अल्पसंख्यक को प्रत्याशी बनाने की वकालत की थी। वहीं बताया जा रहा है कि सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य वर्तमान में बदायूं सांसद डॉ. संघमित्रा के लिए आंवला लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे थे। मांगें पूरी न होने पर मुस्लिम वर्ग में नाराजगी है। माना जा रहा है कि ए को नजरअंदाज करने की वजह से टिकट नहीं बदला गया है कि शिवपाल सिंह यादव मुस्लिम वर्ग की नाराजगी दूर करेंगे।
मैदान छोड़ कर भागे भतीजे अब चाचा की बारी: संघमित्रा मौर्य
बदायूं सीट पर सपा का टिकट बदले जाने पर सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पदाधिकारी, माननीय और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से घबराकर पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव मैदान छोड़कर भाग रहे हैं। वह जहां से भी चुनाव लड़ेंगे वहां के भाजपा कार्यकर्ता उनकी हार की हैट्रिक बनवाएंगे। अब चाचा आ रहे हैं। जो 2019 चुनाव में फिरोजाबाद सीट पर भाजपा प्रत्याशी से 4 लाख 3950 वोट से हारे थे। बदायूं लोकसभा सीट के सभी कार्यकर्ता चाचा की हार का अंतर और बढ़ाएंगे। एक बार फिर मोदी सरकार के नारे के साथ बदायूं में फिर से कमल खिलाएंगे--- डॉ संघमित्रा मौर्य, सांसद।
अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं मुसलमान
पूर्व राज्यमंत्री व सपा के राष्ट्रीय सचिव आबिद रजा ने कहा कि बरेली मंडल में टिकट वितरण में पीडीए में ए की अनदेखी की गई है। सपा की ओर से घोषित प्रत्याशियों में बरेली, शाहजहांपुर, आंवला, बदायूं में किसी भी मुसलमान को टिकट न मिलने से मुसलमान अपने आपको ठगा महसूस कर रहा है। आम मुसलमानों में भी चर्चा है कि क्या सिर्फ मुसलमान वोट इस्तेमाल होता रहेगा। साल 2009 में लोकसभा चुनाव में मुसलमान का टिकट काटकर धर्मेंद्र यादव को दिया गया था। अब बरेली मंडल के टिकट वितरण में पीडीए का ए गायब कर दिया गया। पीडीए के साथ न्याय नहीं हुआ है--- आबिद रजा, राष्ट्रीय सचिव, सपा।
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