Bareilly News: रबड़ फैक्ट्री के 1432 कर्मचारियों के लिए राहत की खबर, बकाया के भुगतान की तैयारी हुई शुरू
बरेली, अमृत विचार। रबड़ फैक्ट्री के 1432 कर्मचारियों के लिए राहत की खबर आई है। फैक्ट्री पर उनके बकाया के भुगतान की तैयारी शुरू हो गई है। ऑफिशियल लिक्विडेटर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के डाटा के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस डाटा का मिलान कर्मचारियों के मूल दस्तावेजों से किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने यूनियन नेताओं को नोटिस भेजकर 15 दिन के अंदर छह बिंदुओं पर ब्योरा मांगा है।
करीब 24 साल से बंद पड़ी रबड़ फैक्ट्री की जमीन की कीमत 18 सौ करोड़ से ज्यादा है जिसके मालिकाना हक का केस बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहा है। कुछ ही महीने पहले इस मामले में उप्र सरकार को पक्षकार बनाए जाने से दूसरे दावेदार अलकेमिस्ट एसेट्स रिकंस्ट्रक्शन लिमिटेड का पक्ष कमजोर हो गया है। दिसंबर में बॉम्बे हाईकोर्ट ने रबड़ फैक्ट्री की जमीन का मालिकाना हक अलकेमिस्ट को देने का पुराना आदेश भी रद्द कर दिया था। इसके बाद फैक्ट्री कर्मचारियों ने अपना बकाया भुगतान करने की मांग तेज कर दी थी। अब उनके लिए राहत भरी खबर आई है।
कारपोरेट कार्य मंत्रालय के ऑफिशियल लिक्विडेटर (आधिकारिक परिसमापक) बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यालय ने एसएंडसी कर्मचारी यूनियन के महासचिव अशोक कुमार मिश्रा, नियन के एडवोकेट एकेएस लीगल कंसल्टेंट के अकबर नेहाल रिजवी और मजदूर संघ के अध्यक्ष प्यारेलाल प्रजापति को नोटिस जारी किया है।
इसमें निर्देश दिया गया है कि कंपनी के मूल वेतन रजिस्टर, ज्वाइनिंग, रीजनल प्रोविडेंट फंड, अंतिम वेतन रिसीव करने की तारीख, कर्मचारियों की सूची, जन्मतिथि और सेवानिवृत्ति की तारीख सीए ऋषि पुरी की रिपोर्ट समेत पूरा विवरण 15 दिन में उपलब्ध करा दिया जाए ताकि सभी कर्मचारियों का डाटा का सत्यापन कराया जा सके।
पिछले साल ही कर्मचारियों का डाटा मान लिया था सही
ऑफिशियल लिक्विडेटर के कार्यालय में जनवरी 2023 में हुई बैठक में कर्मचारियों के डाटा को सही माना गया था। सभी 1432 कर्मचारियों के नियुक्ति पत्र के संबंध में रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर बरेली से सत्यापित कॉपी भी ऑफिशियल लिक्विडेटर को उपलब्ध कराई गई थी। सभी साक्ष्य जांच के बाद सही पाए गए थे।
बता दें कि रबड़ फैक्ट्री के लिए 1960 में मुंबई के सेठ किलाचंद को फतेहगंज पश्चिमी में सरकार ने 3.40 लाख रुपये लेकर 1382.23 एकड़ जमीन दी थी। लीज डीड की शर्त थी कि फैक्ट्री बंद हुई तो सरकार जमीन वापस ले लेगी लेकिन 15 जुलाई 1999 को फैक्ट्री बंद होने पर ऐसा नहीं हो पाया था।
ये भी पढे़ं- Bareilly News: मौलाना तौकीर रजा ने की दंगा भड़काने की कोशिश, तुरंत गिरफ्तारी हो- स्वामी सच्चिदानंद
