गोंडा: विपदाओं से संघर्ष कर लिखी सफलता की इबारत, महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है सीडीओ एम. अरुन्मौलि की कहानी
उमानाथ तिवारी, गोंडा, अमृत विचार। जिले की मुख्य विकास अधिकारी एम अरुन्मौलि की सफलता की कहानी न सिर्फ प्रेरणादायी है बल्कि उन महिलाओं के लिये मिसाल है जो असफलता और बाधा से घबराकर हार मान लेती हैं। उन्होंने जीवन की कई विपदाओं से से लड़कर अपने सफलता की इबारत लिखी है।
सीडीओ ने कहा कि उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया जब उनके सामने मौत को गले लगाना था लेकिन लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और बाधाओं को पार कर लक्ष्य हासिल किया।
तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम की रहने वाली एम अरुन्मौलि की आईएएस बनने की कहानी काफी प्रेरणादायक है। सीडीओ बताती हैं कि स्कूली शिक्षा के शुरुआती दौर में जब आठवीं क्लास में थी तो उनके पिता ने आर्थिक तंगी के कारण उन्हे उनकी मौसी के घर छोड़ दिया। सीडीओ ने मौसी के घर पर रहकर हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई की अच्छे अंक हासिल किए।
इंटर में उन्होने 95.80 फीसदी अंक लाकर पूरे राज्य में तीसरी रैंक हासिल की तो उन्हे इनाम के तौर पर एक बर्तन दिया गया था। पढाई में उनकी लगन और परीक्षा पास करने पर मिले इनाम को देख पिता गदगद हो गए। इसके बाद बीएससी और फिर बीटेक किया। बीटेक में गोल्ड मेडल मिला लेकिन फिर उनकी शादी हो गई और वह घर गृहस्थी में रम गई। एक दौरान उन्हे एक बेटा भी हुआ। फिर ससुराल वालों के कहने पर तैयारी शुरू की और वर्ष 2017 में आईएएस बनी।
सीडीओ का कहना है कि असफलता जीवन का अंतिम परिणाम नहीं है। इस असफलता से ही सफलता का नया मार्ग प्रशस्त होगा। जीवन का अर्थ अलग है और हमें इस अर्थ को समझना पड़ेगा। असफल होने से जीवन का लक्ष्य खत्म नहीं होता। यह असफलता हमें और उसे बेहतर करने की प्रेरणा देती है।
हाईस्कूल व इंटर में फेल होने वाले चाचा बने प्रेरणास्रोत
सीडीओ बताती हैं कि उनके चाचा मूर्ति पहले हाईस्कूल और फिर इंटर में फेल हो गए थे। लेकिन उन्होने हार नहीं मानी और आगे चलकर वह प्रोफेसर बने। चाचा की लगन देखकर उन्हे प्रेरणा मिली और उन्होंने भी कठिन परिश्रम किया। हालांकि पहले वह भी प्रोफेसर ही बनना चाहती थी लेकिन बाद में एक रिश्तेदार जो आईआरएस थे उन्होने मोटीवेट किया तो तैयारी शुरू की और आईएएस बनकर इतिहास रचा।
महिला उत्थान के लिए लगातार काम कर रही सीडीओ
सीडीओ एम अरुन्मौलि जिले की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उन्हे स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसके लिए महिला स्वंय सहायता समूहों पर उनका विशेष फोकस है। स्वंय सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों को बाजार मिल सके इसके लिए उन्होंने आरगा ब्रांड जैसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है। आरगा ब्रांड के जरिए महिलाओं के उत्पाद बाजार में बिक रहे हैं और उनकी आमदनी बढ़ी है। विकास भवन परिसर में शक्ति कैफे का संचालन भी हो रहा है। इसका श्रेय भी मुख्य विकास अधिकारी को है।

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