विकास की गति नियोजित होना आवश्यक :हाई कोर्ट
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कृषि योग्य भूमि पर बूचड़खाना स्थापित करने की अनुमति मांगने के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि पिछले 4 दशकों में लगभग सभी बड़े शहरों में अनियोजित विकास हुआ है। 21वीं सदी में अवैध और अनधिकृत निर्माणों और अतिक्रमणों के खतरे ने विकराल रूप धारण कर लिया है और हर किसी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। आर्थिक रूप से संपन्न लोगों और राज्य के राजनीतिक तथा कार्यकारी तंत्र का समर्थन प्राप्त लोगों ने प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों, मास्टर प्लान आदि का उल्लंघन करते हुए इमारतों, वाणिज्यिक परिसरों, मल्टीप्लेक्स, मॉल आदि का निर्माण किया है। योजना आदि के कारण ऐसे निर्माण सड़कों पर अव्यवस्था पैदा करने के साथ-साथ पानी, बिजली, सीवरेज आदि सार्वजनिक सुविधाओं पर असहनीय बोझ डालते हैं। क्षेत्रीय योजना के अनुसार निर्माण करने के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है।
उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने एम/एस तान्या मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड की याचिका को खारिज करते हुए की। याची कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, दिल्ली से लाइसेंस प्राप्त करने के बाद मांस प्रसंस्करण के व्यवसाय में लगा हुआ है। याची की फैक्ट्री अलीपुर, जिजवाना, हापुड़ रोड, मेरठ में स्थित है। कोर्ट ने आगे कहा कि याची को निर्माण करने से पहले वर्ष 2013 में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना चाहिए था और निवेश करने से पहले मानचित्र स्वीकृत करवाना चाहिए था। अगर मेरठ विकास प्राधिकरण के समक्ष आवेदन दाखिल किया गया होता तो याची को पता चल गया होता कि 12 मीटर के संकीर्ण मार्ग पर संयंत्र स्थापित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उपनियम के अनुसार संयंत्र स्थापित करने के लिए 24 मीटर चौड़ाई की आवश्यकता होती है।
दरअसल याची ने कृषि योग्य भूमि पर बूचड़खाना स्थापित करने के अनुमति मांगी थी। ऐसी व्यावसायिक गतिविधि के लिए सड़क की चौड़ाई पर ध्यान देना आवश्यक होता है, जो वर्तमान मामले में नहीं दिया गया। अतः याचिका खारिज कर दी गई।
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