केमिकल युक्त रासायनिक रंगों से बच कर मनाएं होली :डॉ आरके कुशवाहा
कोरांव/नैनी, अमृत विचार। आपसी सौहार्द और भाईचारे का पर्व होली को प्राचीन काल से ही खेलने की परंपरा रही है। पूर्व में लोग केवल हर्बल रंगों का ही उपयोग करते थे। होली खेलने के बाद शाम को अपनों के साथ मिलने-जुलने की प्रथा रही है। वर्तमान में रासायनिक रंगों का उपयोग, नशा एवं फूहड़ गाने की वजह से होली की गरिमा कम होती जा रही है। होली पर्व में रंगों का भरपूर उपयोग होता है। इसलिए सावधानी भी रखनी जरूरी है। केमिकल युक्त रासायनिक रंगों से बचें। यह रंग आंखों और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हर्बल रंगों का ही उपयोग करें।
होली खेलने जाने के पहले शरीर पर तेल या क्रीम अथवा तेल का मालिश करके जाना चाहिए, जिससे त्वचा को कम नुकसान हो। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। बालों में नारियल अथवा बादाम का तेल लगा सकते हैं। बालों को सुरक्षित रखने के लिए आजकल विभिन्न रंगों के नकली बाल एवं टोपी भी उपलब्ध है। यह न सिर्फ बालों को सुरक्षित रखते हैं बल्कि होली की रंगीन माहौल को और भी रंगीन बना देते हैं। आंखों में यदि रंग या गुलाल चला जाए तो तत्काल ठंडे पानी से धोना चाहिए। आराम न मिलने पर चिकित्सक से सलाह लें और बाजार की मिठाइयों का सेवन कम से कम करें एवं भरोसेमंद दुकान से ही मिठाई खरीदे। उक्त बातों को सुकृत अस्पताल के डॉक्टर सर्जन आर के कुशवाहा ने मंगलवार को पत्रकारों मुलाकात के दौरान कहीं।
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