Lok Sabha 2024: प्रदेश में छह स्थानों से चुनावी मैदान में उतरेगी भाकपा...जिला सचिव अमित बोले- इंडिया गठबंधन में उपेक्षा से आहत हैं वामपंथी

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प्रदेश में छह स्थानों से चुनावी मैदान में उतरेगी भाकपा

चित्रकूट, (विकास श्रीवास्तव)। कभी जिले की राजनीति में अच्छा खासा दखल रखने वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी हाशिए पर है। सन् 1989 के बाद से कोई वामपंथी बांदा-चित्रकूट सीट से दिल्ली नहीं पहुंच सका। हालांकि पार्टी प्रत्याशी भाग्य जरूर आजमाते रहे। इस बार भी सीपीआई ने प्रदेश में छह स्थानों से चुनाव लड़ने का मन बनाया है। जिला सचिव अमित यादव एडवोकेट स्वीकारते हैं, इसकी वजह इंडिया गठबंधन द्वारा प्रदेश में पार्टी की उपेक्षा है और हम इससे आहत हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का कभी जिले में परचम लहराता था। सन् 67 में जागेश्वर यादव सांसद चुने गए थे। इनके बाद आया जिले की राजनीति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले रामसजीवन सिंह का वक्त। रामसजीवन पार्टी के टिकट से चार बार विधायक चुने गए तो एक बार सांसद भी बने सन् 1989 में पर इसके बाद जो सूखा पड़ा तो अभी तक इस पार्टी के लिए वोटों की वो बारिश नहीं हुई, जिसमें भीगकर पार्टी का प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचता।

हालांकि इस बार भी जिले से पार्टी ने अपना प्रत्याशी उतारने की सोची है। भाकपा जिला सचिव अमित यादव बताते हैं कि बीते दिनों पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रदेश प्रभारी गिरीश शर्मा के साथ हुई बैठक में प्रदेश सचिव अरविंद राज स्वरूप ने प्रदेश में अपनी स्थिति और गठबंधन द्वारा की जा रही उपेक्षा की बात कही थी।

बताया कि भाकपा ने प्रदेश में गठबंधन से अधिकतम तीन सीटों की दरकार की थी। पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा की जा रही उपेक्षा से आहत पार्टी ने तय किया है कि छह स्थानों पर चुनाव लड़ा जाए। इनमें बांदा-चित्रकूट की सीट भी शामिल है। बताया कि पार्टी ने अन्य जिन लोकसभा सीटों में अपने उम्मीदवार उतारने की सोची है, उनमें गाजीपुर, मऊ, घोसी, राबर्ट्सगंज और शाहजहांपुर है।

बताया कि जिन जगहों पर पार्टी ने गठबंधन से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, वहां पर सपा ने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। पार्टी के प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं दी गई। ऐसे में अपने स्वाभिमान को देखते हुए भाकपा ने भी अभी तक के निर्णय के अनुसार प्रत्याशी उतारने की सोची है। जल्द ही इनकी घोषणा भी कर दी जाएगी। 

ताली एक हाथ से नहीं बजती

अमित ने कहा कि प्रदेश में वामपंथी दलों की उपेक्षा से आहत हैं। ताली एक हाथ से तो नहीं बजती। जब उनसे कहा गया कि आप जीतने की स्थिति में तो हैं नहीं, ऐसे में वोटकटवा ही साबित होंगे और गठबंधन को नुकसान पहुंचाएंगे, अमित ने कहा कि गठबंधन धर्म भी कोई धर्म होता है। और रही जीतहार की बात तो जनता जैसा चाहेगी, वही होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी भी पार्टी ने आस नहीं छोड़ी है।

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