Kanpur: हाइटेक फेको मशीन से हैलट में मोतियाबिंद का ऑपरेशन, GSVM के नेत्र रोग विभाग में 25 लाख की मशीन स्थापित
कानपुर के जीएसवीएम के नेत्र रोग विभाग में 25 लाख की मशीन स्थापित
कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में मोतियाबिंद का इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए यह एक अच्छी खबर है।
हैलट के नेत्र रोग विभाग में अब छोटे चीरे से ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाएगा। वहीं, मरीज को एक सप्ताह में आराम भी मिल सकेगा। इसके लिए नेत्र रोग विभाग को विधायक निधि से फेको मशीन उपलब्ध करा दी गई है।
हैलट के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों प्रतिदिन करीब सौ मरीज मोतियाबिंद से पीड़ित पहुंच रहे हैं। अभी मोतियाबिंद का ऑपरेशन होने के बाद मरीजों को ठीक होने पर करीब 15 दिन का समय लगता है। लेकिन अब नेत्र रोग विभाग में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के बाद मरीजों को एक सप्ताह में आराम मिल सकेगा।
इसके लिए विभाग में अत्याधुनिक फेको (फेमोइमल्सिफिकेशन) मशीन कल्यानपुर विधायक नीलिमा कटियार ने अपनी निधि से उपलब्ध कराई है। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ.शालिनी मोहन ने बताया कि करीब दो माह पहले मशीन के संबंध में विधायक नीलिमा कटियार को अवगत कराया गया था, जिस पर उन्होंने हामी भरते हुए अपनी निधि से फेको मशीन उपलब्ध कराने के संबंध में आश्वासन दिया था।
मशीन के संबंध में टेंडर आदि प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह मशीन अब आ गई है। मशीन की मदद से आंख के आसपास इंजेक्शन से सुन्न करने की बजाए फेको विधि में केवल 2.8 एमएम का छोटा छेद कर अत्याधुनिक मशीन से मोतियाबिंद को आंख के भीतर घोल दिया जाता है। इसके बाद फोल्डेबल लेंस आंख में प्रत्यारोपित किया जाता है।
मरीज जागते हुए भी करा सकते ऑपरेशन
फेको मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान आंख और आसपास के क्षेत्र को सुन्न करने के लिए आंख में आई ड्रॉप डाला जाता है। फेको प्रक्रिया के दौरान मरीज जागते रहते हैं, लेकिन कोई दर्द महसूस नहीं होता है। फेको ऑपरेशन टांके रहित व दर्द रहित प्रक्रिया है।
यह तकनीक एक सूक्ष्म चीरे द्वारा की जाती है। चीरा छोटा होता है तो उसे ठीक करने के लिए टांके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है। वह कुछ ही दिनों में ही ठीक हो जाता है। इस विधि से गर्मी के दिनों में भी आपरेशन कराने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
