बरेली: चुनावी जनसभा के लिए खैर के डेढ़ सौ पेड़ों पर चलवा दी आरी, DFO ने मांगी रिपोर्ट
बरेली, अमृत विचार: आलमपुर जाफराबाद में राजनीतिक कार्यक्रम के लिए सेना और वन विभाग की अनुमति के बगैर डेढ़ सौ से ज्यादा हरे पेड़ों को काट दिए जाने के मामले में प्रभागीय वनाधिकारी ने आंवला के रेंजर से रिपोर्ट मांगी है।
आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक के फौजी पड़ाव आलमपुर में सेना की करीब सात हेक्टेयर जमीन है। लोकसभा चुनाव 2019 में यहीं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद यहां कैंपा योजना के तहत 2019 में खैर के 77 सौ पौधे लगाए गए थे। पांच साल में ये पौधे पेड़ में तब्दील हो चुके थे। लोकसभा चुनाव से पहले अब फिर इस जगह को चुनावी जनसभा के लिए तैयार किया जा रहा है। सोमवार को यहां हैलिपैड बनाने के लिए जिले के उच्चाधिकारियों ने निरीक्षण किया था। इसके बाद चिह्नित स्थल पर खड़े तमाम पेड़ों को मंगलवार को काट दिया गया।
कहा जा रहा है कि अधिकारियों के कहने पर ही पेड़ों को काटा गया। पेड़ काटने से पहले सेना और वनविभाग से न अनुमति ली गई न कोई सूचना दी गई। माना जा रहा है कि चूंकि ये पेड़ सरकारी योजना के तहत लगाए गए थे, इसलिए उन्हें काटने का कारण स्पष्ट करना संभव नहीं था। इसके बावजूद अगर अनुमति लेकर पेड़ों को काटा जाता तो साफ हो जाता कि प्रशासन ने चुनावी जनसभा के लिए पेड़ कटवाए हैं, इसीलिए अनुमति के बगैर ही उन्हें कटवा दिया गया।
...तो अफसरों ने चुनावी जनसभा के लिए चोरी-छिपे कटवाए पेड़
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक डेढ़ सौ से ज्यादा पेड़ काट दिए गए हैं। आंवला के रेंजर सुशील बिष्ट ने बताया कि पेड़ काटे जाने की सूचना पर वह मंगलवार देर शाम मौके पर पहुंचे थे, लेकिन पेड़ काट रहे लोग अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। इसके बाद मौके पर वनरक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है। इस बारे में आलमपुर जाफराबाद के बीडीओ से भी बात करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
मंगलवार शाम इस मामले में शिकायत मिली थी। आंवला के रेंजर को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी---दीक्षा भंडारी, प्रभागीय वनाधिकारी।
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