रामपुर में होता है औसतन 43925 मीट्रिक टन आम का उत्पादन, इन जिलों को होती है पौधों की सप्लाई
जनपद में आम के बागों का है 3405 हेक्टेअर रकबा, 12.9 प्रति हेक्टेअर है पैदावार, नवाबों ने कई कलमें अपने यहां कराई हैं तैयार जिसमें समर बहिश्त, लैली, फजली हैं प्रमुख
बाग में पेड़ पर लटके आम।
रामपुर, अमृत विचार। लजीज व्यंजनों की तरह रामपुर नवाबी दौर से आम के लिए भी जाना जाता रहा है। नवाबों ने आम की कई कलमें तैयार कराईं। इनमें समर बहिश्त, लैली और फजरी प्रमुख हैं। इसके अलावा बनारसी लंगड़े की तरह रामपुरी लंगड़ा भी अपनी अलग पहचान रखता है। जिले में आम के बागों का रकबा 3405 हेक्टेअर है। एक हेक्टेअर में करीब 12.9 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। प्रतिवर्ष आम का उत्पादन 43925 मीट्रिक टन है।
नवाबी दौर से ही रामपुरी लंगड़ा लोगों के दिलों पर राज कर रहा है। दशहरी, चौसा भी अपनी मिठास घोल रहा है। सदर क्षेत्र का इलाका फल पट्टी के नाम से जाना जाता है। देश के कई सूबों में रामपुरी लंगड़ा आम की अलग पहचान हैं। मलिहाबाद की तर्ज पर रामपुरी दशहरी भी खूब पसंद की जाती है। फल सब्जी एसोसिएशन के महामंत्री एम आमिर खां बताते हैं कि आम की खरीद के लिए निर्यातकों ने आना शुरू कर दिया है। अधिकतर बाग की फसल बौर आने से पहले ही बिक चुकी है। निर्यातक दिल्ली की आजादपुर मंडी से भी फजली और चौसा आम को देश-विदेश में निर्यात करते हैं।
आमिर खां बताते हैं कि प्रशासन ने लोकसभा चुनाव के चलते डूंगरपुर स्थित नवीन मंडी को छह जून तक के लिए खाली करा लिया है। रमपुर में आम की बहुत दुर्गति होने वाली है। मंडी बाहर लग रही है। आम को पकाने के लिए दुकानों में रखा जाता है। आम खराब होने पर या तो बहुत महंगा होगा या बहुत कम कीमत पर बिकेगा।
मिर्जा गालिब को भी बहुत पसंद थे आम
प्रसिद्ध शायर मिर्जा असद उल्लाह खां को भी आम बहुत पसंद थे। मिर्जा गालिब अपनी शायरी के साथ ही अपनी हाजिर जवाबी के लिए भी जाने जाते हैं। एक बार सड़क किनारे आमों का ढेर पड़ा था। उधर से टहलता एक गधा आया। उसने आमों को सूंघा और आगे बढ़ गया। तभी गालिब के एक दोस्त ने कहा कि देखो गधे भी आम नहीं खाते। गालिब ने दोस्त को जवाब दिया कि हां गधे आम नहीं खाते।
संभल, अमरोहा और बिलारी को भी होती है पौध की सप्लाई
उद्यान निरीक्षक ब्रजमणि गहलौत ने बताया कि जिले की पौधशालाओं में तैयार आम की कलमी पौध कई साल से संभल, बिलारी और अमरोहा को सप्लाई होती हैं। रामपुर की पौध से ही संभल, बिलारी अमरोहा क्षेत्र में आम के बाग फल-फूल रहे हैं। उत्तराखंड में भी कलमी पौध की मांग बढ़ी है।
शासन को भेजे गए मैंगो पैक हाउस के प्रस्ताव
उद्यान विभाग ने जिले में मैंगों पैक हाउस की स्थापना के प्रयास तेज कर दिए हैं। तीन महीने पहले तीन प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं। मैंगों पैक हाउस बनने से आम के व्यापारियों को और लाभ मिलेगा।
मई से अगस्त तक पकती हैं आम की यह फसलें
मई में पकने वाली- बंबइया, स्वर्णरेखा, अलफांसो।
जून में पकने वाली- दशहरी, लंगड़ा, तोतापरी।
जुलाई में पकने वाली- फजली, सीपिया, आम्रपाली।
अगस्त में पकने वाली- बथुआ, चौसा।
रामपुर में यह हैं प्रमुख बाग
शाहबाद का लक्खी बाग, खासबाग, बेनजीर
प्लाटिंग करने वाले कर रहे आम के बागों का सफाया
स्वार रोड पर ठोठर, मोरी गेट, डूंगरपुर निकट पुलिस लाइन और डायमंड सिनेमा के निकट समेत शहर में कई जगह प्रापर्टी डीलर ने आम के बागों को साफ कर दिया। इसमें वन विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है। डायमंड सिनेमा के निकट वक्फ की जमीन पर कब्जा करके आम के बाग को कटवाकर प्लाटिंग कर दी गई है। इसके कारण पर्यावरण भी बिगड़ने लगा है।
जिले में आम के बागों का रकबा 3405 हेक्टेअर है। एक हेक्टेअर में करीब 12.9 मीट्रिक टन उत्पादन है। प्रतिवर्ष आम का 43925 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। रामपुर की तहसील सदर और शाहबाद क्षेत्र में आम के बागों की संख्या काफी है।-नरेंद्र पाल, जिला कृषि अधिकारी
